Home आस्था सावन के सोमवार भक्तों को दर्शन देते हैं रामेश्वर महादेव

सावन के सोमवार भक्तों को दर्शन देते हैं रामेश्वर महादेव

शिवभक्ति की अलौकिक अनुभूति का केंद्र है यह ऐतिहासिक मंदिर

JALAUN NEWS: श्रावण मास के सोमवारों का विशेष महत्व यूँ ही नहीं है। यह सिर्फ श्रद्धा और आस्था का पर्व नहीं, बल्कि शिवभक्ति की उस परंपरा का प्रतीक है जो वैदिक युग से चली आ रही है। इसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है माधौगढ़ कस्बे में स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर, जो न केवल प्राचीनता की मिसाल है बल्कि शिवभक्तों की आस्था का अटूट केंद्र भी है।इस मंदिर की स्थापना रामपुरा क्षेत्र के करनखेरा के राजा कर्ण सिंह द्वारा की गई थी, जो भगवान शिव के परम भक्त थे। इतिहास बताता है कि मुग़ल शासक औरंगज़ेब की सेना ने मंदिर को ध्वस्त करने की कोशिश की थी, लेकिन शिवलिंग को क्षति नहीं पहुँचा सके। हालांकि मंदिर के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जिनके अवशेष आज भी मंदिर परिसर में मौजूद हैं और इतिहास की गवाही देते हैं। स्थानीय बुज़ुर्गों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह शिवलिंग पाँच प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। मंदिर में भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश एक साथ विराजमान हैं। खास बात यह है कि यहां स्थित शिवलिंग पीली रेत से निर्मित है, जो अमरत्व और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इसका नाम रामेश्वर रखा गया – ठीक उसी प्रकार जैसे भगवान राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी।वैसे तो वर्षभर श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से रामेश्वर महादेव एवं भूरेश्वर का जलाभिषेक करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।स्थापना काल से लेकर अब तक मंदिर की सेवा का कार्य स्थानीय महंतों और पुजारियों द्वारा किया जाता रहा है। मंदिर की धार्मिक परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा और नियमों के अनुसार निभाई जाती हैं।