Home उत्तर प्रदेश सवर्णों का शोषण बंद हो, यूजीसी का काला कानून वापस  होना ही...

सवर्णों का शोषण बंद हो, यूजीसी का काला कानून वापस  होना ही चाहिए – दिलीप गहरवार

MIRZAPUR NEWS: जिला करणी सेना के माध्यम से जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार ने यूजीसी के काले कानून को वापस लेने के लिए सरकार से मांग की है। यूजीसी के काले कानून को मिटाने के लिए घंटाघर मैदान से एक विशाल सवर्ण स्वाभिमान यात्रा नगर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ जिला मुख्यालय पर पहुंचा। जनसभा वहां पहुंचकर एक विशाल जनसभा में तब्दील हुई। वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए करणी सेना के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार में कहां कि तुष्टिकरण की राजनीति , जातिगत राजनीति, ना तो भारत संविधान का स्वरूप रही है और ना ही भारत देश की संस्कृति रही है । वर्तमान समय में जातिगत राजनीति देश के लिए खतरा साबित हो रही है। देश की अखंडता और सुचिता के लिए खतरा बन सकती हैं। यूजीसी का जो काला कानून लाया गया है उसे समूचा सवर्ण समाज पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। तुष्टिकरण की राजनीति के चलते सवर्णों पर पहले से ही काफी अत्याचार हो रहा है । सवर्ण समाज अब अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेगा।  सरकार की दूषित मानसिकता राजनीति से उठकर अब स्कूल कॉलेज तक पहुंच गई है जो बहुत ही खराब है ,और छात्रों को भी राजनीति में शामिल किया जा रहा है और देश को बर्बाद करने की यह नीति है। करणी सेना समूचा जिला इकाई व हम सभी सवर्ण समाज इस यूजीसी के काले कानून का विरोध करते हैं, और इसे वापस लेने की मांग करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर पूर्व में ही रिश्ते लगा दिया गया है फिर भी कुछ लोग जो देश में शांति का माहौल बिगाड़ना चाहते हैं वह लोग इसको अपने मन माने तरीके से अपने व्यक्तिगत आधार पर लागू कर रहे हैं । जबकि भारत के संविधान ने अभी लागू नहीं किया है , न हीं माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इसे क्लीन चिट् दी है।  यदि सरकार ने यूजीसी का काला कानून वापस नहीं लिया तो इसके लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करने से स्वर्ण समाज पीछे नहीं रहेगा। जनसभा में उपस्थित सभी सवर्ण समाज के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जरा सोचिए, कल जब आपका बेटा/बेटी रात भर जागकर पढ़ाई करेगा, नीट में 680+ लाएगा,   टॉप रैंक लाएगा, फिर भी उसका सपना टूट जाएगा… सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका जन्म “जेनरल कैटेगरी” में हुआ है। आपके बच्चे की आँखों में वो आंसू होंगे जो आपने कभी नहीं देखे। ये लड़ाई सिर्फ नौकरी-सीट की नहीं है। ये लड़ाई आपके बच्चे के आत्मसम्मान, उसके सपनों, और उसके भविष्य की है। देश को जोड़ने वाली शिक्षा नीति की आवश्यकता थी, लेकिन UGC के Promotion of Equity Regulations, 2026 शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता के बजाय भय और असंतुलन पैदा कर रहे हैं। यह किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि उस प्रणाली पर सवाल है जहाँ न्याय की प्रक्रिया एकतरफा होती दिखाई दे रही है। हम सभी सामाजिक वर्गों के सम्मान और सुरक्षा के पक्ष में हैं, लेकिन समानता के नाम पर किसी एक वर्ग को न्याय से बाहर रखना उचित नहीं हो सकता। न्याय की परिभाषा पहचान के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए। इन नियमों के तहत गठित इक्विटी कमेटियों में निष्पक्ष और स्वतंत्र प्रतिनिधित्व की कमी है। शिकायत की परिभाषा अत्यंत व्यापक है, जबकि झूठी शिकायतों पर जवाबदेही स्पष्ट नहीं है। शिक्षा संस्थान डर नहीं, संवाद और ज्ञान के केंद्र होने चाहिए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने सरकार से मांग किया है कि नियमों पर पुनर्विचार हो, सभी छात्रों के लिए समान शिकायत तंत्र बने और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, क्योंकि देश को बाँटने नहीं, जोड़ने वाले फैसलों की ज़रूरत है। करणी सेना और समूचा सवर्ण समाज परिवार इस यूजीसी के काले कानून और गंदी राजनीति विषैली राजनीति का भरपूर विरोध करता है और समूचे स्वर्ण समाज का आवाहन करता है कि वह एक पटल पर आए और इस काले कानून का विरोध करें और अपने और अपने आने वाली वीडियो की भविष्य को काला कलंक लगने से बचें और तुष्टिकरण की राजनीति जातिगत राजनीति गंदी राजनीति भारत देश में बंद हो जो कभी भी इसका स्वरूप नहीं रही है। *एक देश, एक धर्म, एक मानव,* की व्यवस्था लागू करने की कृपा करें। इस अवसर पर उपस्थित रहने वालों में पुष्पेंद्र कुमार पाठक, जगदीश दुबे ,डॉक्टर अवनीश सिंह, मोहित सिंह, मधुकर मिश्रा, अनिल पांडे ,साधु तिवारी, अखिलेश मिश्रा, प्रीतम सिंह, मंगल सिंह ,सोनू विश्वकर्मा, अभिषेक सिंह धवल ,यज्ञ नारायण पांडे , इंस्पेक्टर सिंह शिवम, अनुराग सिंह, रितेश, आशीष सिंह, सारस्वत सिंह, मोनू सिंह, मनीष सिंह, रणजीत सिंह, संतोष सिंह, संपूर्ण सिंह, राजेश सिंह, युवराज, मनोज शुक्ला सहित सैकड़ो कार्यकर्ता पदाधिकारी सवर्ण स्वाभिमान यात्रा में शामिल रहे।