आध्यात्मिक जागृति से ही जीवन में आती है पूर्णता
PRAYAGRAJ NEWS: बुधवार मनुष्य आध्यात्मिक रूप से जाग जाता है तो उसके जीवन में पूर्णता आ जाती है । ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भाव, ‘एकत्व’ का भाव ,मन की अवस्था बन जाती है । वह कल्याणकारी, परोपकारी भाव वाला इंसान बन जाता है क्योंकि उसे अपने आपका, “स्व” का बोध हो जाता है । उक्त उद्गार दिल्ली से आए हुए केंद्रीय प्रचारक संत श्री गगन भाटिया जी ने झलवा स्थित घुंघरू चौराहे के पास (शंभू नाथ इंस्टीट्यूट रोड) संत निरंकारी मिशन के तत्वाधान में आयोजित हुए एक विशेष सत्संग कार्यक्रम में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति की स्थिति में बुरे को भी बुरा नहीं कहा जाता बल्कि उसके लिए भी भले की कामना की जाती है । यहां कोई प्रतिशोध, कोई प्रलोभन, कोई भय, कोई आशा-निराश नहीं रहती, यहां अपने – पराए का भेद नहीं रहता , जहां मैं – मेरे का भाव समाप्त हो जाता है, जहां अनेकत्व के स्थान पर एकत्व का भाव स्थाई हो जाता है । समदृष्टि की उत्पत्ति ही आध्यात्मिक जागृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति वाला व्यक्ति अपने अंग संग परमात्मा को निहारते हुए सबको परमात्मा में तथा सब में परमात्मा के दर्शन करता रहता है । ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मार्ग पर चलते हुए सबके भले की कामना करता है और सदैव प्रभु की कृपा का पात्र बना रहता है । आज निरंकारी मिशन, सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन मार्गदर्शन में लोगों को परमात्मा का बोध कराकर आध्यात्मिक रूप से जागृत करने का कार्य कर रही है । सेवादल संचालक फूलचंद ने सेवादल के भाई बहनों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया।







