Home आस्था श्रीमद्भागवत महापुराण का प्राण है महारास : शांतनु जी महाराज

श्रीमद्भागवत महापुराण का प्राण है महारास : शांतनु जी महाराज

छठवें दिन आचार्य शांतनु जी महाराज ने गोवर्धन लीला व प्रेरक प्रसंगों से किया भावविभोर
 JAUNPUR NEWS: सुइथाकला विकासखंड क्षेत्र के सुइथाकला गांव में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना मानो साक्षात वृंदावन ही स्थापित हो उठा हो और श्रोता भक्ति रस में पूरी तरह डूब गए। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचन में भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला सहित कई प्रेरक एवं कर्मप्रधान प्रसंगों का वर्णन किया। उनकी मधुर वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भागवत का प्राण महारास है,” जो भक्ति और प्रेम का सर्वोच्च स्वरूप है। उपस्थित लोगों ने कथा श्रवण कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. रमेश सिंह, डॉ. दिनेश सिंह एवं डॉ. उमेश सिंह ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। मुख्य यजमान इंद्रावती सिंह एवं यमुना प्रसाद सिंह ने विशेष रूप से धन्यवाद दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ अवनीश सिंह ‘गुरुजी’, अरुण कुमार सिंह मुन्ना, अधिवक्ता विपिन कुमार सिंह, श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज समोधपुर के सेवानिवृत्त शिक्षक राम दुलार वर्मा, इंजीनियर चंदन निषाद, अजय सिंह (इंस्पेक्टर) सहित अन्य  लोग उपस्थित रहे।