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शीर्षक – जिंदगी कहती है

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ये जिंदगी तो करती है बस अपनी मनमानी,
हर इंसान की अपनी है एक अलग कहानी,
कर्मों का हिसाब-किताब निरंतर चलता है,
कहीं है कारी बदरी तो कहीं धूप आसमानी ।

जो रूठ जाता है जिंदगी की समस्याओं से,
दूर हो जाता है वो तो सफ़ल संभावनाओं से,
वो जिंदगी को अपनी बोझिल बना लेता है,
टूट जाता है वो दर्दनाक भारी विपदाओं से ।

सीखों बाधाओं को नज़रिया बदल दूर करना ,
अपने “आनंद” आत्मविश्वास को प्रबल रखना,
वर्तमान परिस्थितियों को बदला जा सकता है,
जिंदगी कहती हैं चाहते हो तुम यूॅं प्यार करना ।

बड़े ही टेढ़े-मेढ़े दांव-पेंच है अलबेली जिंदगी के,
सुख-दुःख के मोल भाव प्रेम संतुष्टि सादगी के,
खोटे सिक्के को एक प्रभु तू ही सोना है बनाता,
कारण बहुत सारे है दीनानाथ तेरी बंदगी के ।

–  मोनिका डागा  “आनंद”, चेन्नई, तमिलनाडु ❤️


आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद !
रचना ( स्वरचित व सर्वाधिकार सुरक्षित)✍️