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शिक्षामित्र मामले में डीएम के जांच आदेश में बीएसए के कड़े तेवर दोषी बक्शा नहीं जाएगा

LAKHIMPUR KHERI NEWS: कहते हैं आप धनबल पावर के दम पर कुछ ही दिन भ्रष्टाचार कर सकते हैं क्योंकि ना जीवन भर सर्विस रहती है किसी की ना पावर रहता है जब मामला खुलता है तो पुराने पन की अकड़ खत्म होती है जारी होती है नतमस्तक की प्रक्रिया जैसा की शिक्षक की भूमिका निभाई शिक्षा मित्र सतीश कुमार ने हेडिंग से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की खबर का हुआ असर मामले में जिला अधिकारी ने संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं देखते हैं निष्पक्ष जांच में शिक्षा मित्र का भ्रष्टाचार बेनकाब होगा की विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता से मामले को दबाने का प्रयास भी किया जा सकता है वह आने वाला समय बताएगा। गौरतलब है जनपद लखीमपुर-खीरी ब्लॉक फूलबेहड़ के अगरा के रहने वाले सतीश कुमार शिक्षामित्र के पद पर प्राथमिक विद्यालय भिखना पुर में शिक्षामित्र की नियुक्ति 2001 में हुई थी तथा नियुक्ति के दौरान शिक्षामित्र स्कूल में छात्रों को पढ़ता भी रहा और बिना अवकाश के शिक्षा विभाग को गुमराह करते हुए युवराज दत्त महाविद्यालय में रेगुलर छात्र के रूप में शिक्षा ग्रहण करता रहा एक साथ पढ़ना और पढ़ाना का काम कर रहा था मजे की बात शिक्षामित्र के मामले की खंड शिक्षा अधिकारी को पूरी जानकारी थी उसके बाद न कोई जांच न कराई जिससे शिक्षामित्र का मनोबल इतना बढ़ गया कि वह कभी-कभी स्कूल जाता है उनके परिवार के एक सदस्य एनपीआरसी के पद पर तैनात थे इस बात का दबाव या शिक्षा मित्र बनाता रहता है और मौज काट रहा है।जैसे एक मिसाल यह तो अभी ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है इस शिक्षा मित्र की वाकई में पिक्चर बाकी है इसके श्रीराम चाचा एनपीआरसी के पद कार्यरत थे जो सेटिंग गेटिंग के चलते जो भी खंड शिक्षा अधिकारी आता था इनका मुरीद हो जाता था इसी के चलते शिक्षा मित्र स्कूल में पढ़ता भी गया और पढ़ाता भी गया हां और जब इस शिक्षामित्र का भ्रष्टाचार लोगों ने उजागर किया था तो उक्त शिक्षा मित्र ने धनबल के दमपर अपना पावर दिखाकर अपने को बचाकर अपने पक्ष में जांचकर कर लोगों को झूठा साबित कर दिया था लेकिन अब इसका चाचा रिटायर हो चुका है पावर खत्म हो चुका है अकड़ भी खत्म हो चुकी है अब यह बेनकाब होगा।