KUSHINAGAR NEWS: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के ऐसे प्राथमिक विद्यालय जिनमें छात्रों की संख्या 150 से कम है एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय जिनमें 100 से कम नामांकन है, को पेयरिंग योजना के अंतर्गत पेयरिंग करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस निर्णय के खिलाफ उत्तर प्रादेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ब्लॉक इकाई कसया के नेतृत्व में कसया क्षेत्र के सैकड़ों शिक्षकों ने एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की।यह बैठक संघ के अध्यक्ष सुरेश प्रसाद रावत की अध्यक्षता में तथा मंत्री नीरज कुमार श्रीवास्तव के संचालन में संपन्न हुई, जिसमें शासनादेश को शिक्षकों, रसोइयों और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए अत्यंत घातक बताते हुए विरोध दर्ज किया गया। बैठक में यह बताया गया कि इससे एक ओर जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा बाधित होगी, वहीं दूसरी ओर हज़ारों शिक्षकों और रसोइयों की आजीविका भी खतरे में पड़ जाएगी।शिक्षक नेताओं ने बताया कि शासन की इस प्रक्रिया के तहत पहले ही लगभग 20 हज़ार विद्यालयों का विलय किया जा चुका है और हजारों प्रधानाध्यापक पद समाप्त किए जा चुके हैं। अब इस नई प्रक्रिया से शिक्षा व्यवस्था में और अधिक अव्यवस्था फैलने की आशंका है। इस मौके पर सर्वसम्मति से एक ज्ञापन तैयार किया गया, जो विधायक कुशीनगर श पी. एन. पाठक को संबोधित किया गया। यह ज्ञापन भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष आद्या पाण्डेय के माध्यम से विधायक प्रतिनिधि को सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर इस आदेश को निरस्त कराया जाए जिससे बच्चों की शिक्षा और शिक्षकों की सेवा दोनों सुरक्षित रह सकें।इस बैठक एवं विरोध कार्यक्रम में मनोज कुमार चतुर्वेदी, दीपेश कुमार सिंह, मूरत यादव, भरदुल प्रसाद, रामचंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, अमरनाथ पाठक, तेजप्रताप शर्मा, अरुण कुमार वर्मा, प्रभाकर सिंह, धनंजय मणि त्रिपाठी, रणजीत सिंह, बैतुल्लाह सिद्दीकी, रीता सिंह, अशोक कुमार गोंड, राजीव चौबे, प्रतिभा सिंह, बबीता मद्धेशिया, मधुलिका तिवारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। साथ ही रसोइया संघ की ओर से उमापति देवी, सुनीता देवी, मनभावती देवी, कुसुमावती देवी, कांति देवी, ध्रुबतारा देवी एवं उमरी देवी ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराते हुए इस निर्णय को जनविरोधी बताया। कार्यक्रम के अंत में शिक्षक नेताओं ने प्रदेश सरकार से अपील की कि बच्चों की शिक्षा, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवं रसोइयों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।







