Home आस्था शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दायर

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप, स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में शिकायत दायर

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प्रयागराज, संवाददाता। माघ मेले में हाल ही में हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। उनके खिलाफ आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण, बाल उत्पीड़न तथा अन्य अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप भी लगाए गए हैं।

पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत, FIR न होने पर कोर्ट पहुंचे

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने 24 जनवरी 2026 को झूंसी थाने में तहरीर दी थी। इसके बाद 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक, माघ मेला प्रयागराज को ई-मेल से शिकायत भेजी गई तथा 27 जनवरी को डाक के माध्यम से भी शिकायत भेजी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने कोई FIR दर्ज नहीं की। प्रशासन की निष्क्रियता और कथित धमकियों के बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।


शिविर और गुरुकुल में नाबालिगों के शोषण का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है और उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, पालकी उठाने तथा अन्य कार्य कराए जाते हैं। शिकायतकर्ता ने बाल श्रम, बाल अधिकारों के उल्लंघन तथा यौन उत्पीड़न की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कोर्ट में दायर वाद के अनुसार, दो नाबालिग बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें धार्मिक आस्था और गुरु-सेवा के नाम पर दबाव बनाकर यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि माघ मेला और पूर्व के आयोजनों के दौरान भी कथित रूप से उत्पीड़न की घटनाएं हुईं।


अवैध हथियार, आय से अधिक संपत्ति और बैंक खातों की जांच की मांग

शिकायत में शिविर में अवैध हथियार होने की आशंका जताते हुए जांच की मांग की गई है। साथ ही आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की भी जांच कराने की मांग की गई है। मुकुंदानंद नामक व्यक्ति की भूमिका की जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है।


फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का भी आरोप

दूसरी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताते हुए “ज्योतिष पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज तैयार कर प्रशासनिक अधिकारियों को भेजे। शिकायतकर्ता ने इन दस्तावेजों को फर्जी और भ्रामक बताते हुए जांच की मांग की है। इन पत्रों पर 24 जनवरी 2026 की तारीख दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।


मौनी अमावस्या पर पुलिस और शिष्यों के बीच हुआ था विवाद

18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने संगम जाने से रोक दिया था और पैदल जाने को कहा था। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इस घटना के बाद विवाद और बढ़ गया था।


कोर्ट में पेश हुए नाबालिग, नोटिस जारी

स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में 8 फरवरी को वाद दायर किया गया, जिसमें दो नाबालिगों को भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया। 10 फरवरी को उनके अधिवक्ता ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर आरोपों को निराधार बताया है।


20 फरवरी को होगा अहम फैसला

अब 20 फरवरी को कोर्ट में दोनों पक्षों की सुनवाई होगी। न्यायालय दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद FIR दर्ज करने का आदेश दे सकता है या शिकायत को खारिज भी कर सकता है।


कानूनी स्थिति (महत्वपूर्ण)

यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय की जांच और सुनवाई के बाद ही होगा।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का स्वामी रामभद्राचार्य ने किया था विरोध

मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर तुलसी पीठ स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा-

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अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। संगम तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। उनको बिल्कुल सही नोटिस दिया गया।

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले-

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स्वामी रामभद्राचार्य की बात मत करिए, वो दोस्ती निभा रहे हैं। उनको लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वो कुछ भी बोलते हैं। वो हमारे कुल का है ही नहीं। अगर हमारे कुल का होता तो उसको हमारा दर्द होता। जहां तक पालकी की बात है, पेशवा भी हमारी पालकी उठवाकर लाते थे।