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वैश्विक संकट के दौर में भारत का संतुलित विकास मॉडल प्रेरणादायक: प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी

VARANASI NEWS:  स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में तेरहवें दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारम्भ हुआ। इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय आध्यात्मिकता: वैश्विक कल्याण, सततता और डिजिटल सजगता के लिए एक सिद्ध प्रतिमान है। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उदघाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी  के कुलपति प्रो० अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आध्यात्मिकता केवल किसी एक परंपरा या धर्म तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हर मानव के जीवन से जुड़ा एक मूलभूत आयाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन युवा पीढ़ी को यह समझाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं कि आध्यात्मिकता केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि इसका आधुनिक विज्ञान और समकालीन समाज से भी गहरा संबंध है। वर्तमान वैश्विक संकटों के दौर में भारत ने जिस प्रकार विकास और संतुलन का मार्ग प्रस्तुत किया है, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है। अध्यात्म्कता और वैश्विकता के मध्य सम्बन्ध स्थापित करते हुए प्रो. चतुर्वेदी ने कहा  कि सच्ची आध्यात्मिक समझ तभी विकसित होती है, जब हम विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और धर्मों का अध्ययन और सम्यक् समझ विकसित करें। यदि हम केवल एक ही परंपरा तक सीमित रहेंगे, तो ज्ञान का दायरा संकुचित रह जाएगा। विविध परंपराओं के अध्ययन से न केवल पूर्वाग्रह कम होते हैं, बल्कि शोध के नए प्रश्न और दृष्टिकोण भी सामने आते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेज वाराणसी, आज आध्यात्मिकता, समावेशिता और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीकी प्रगति से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में प्रो. विक्रम सिंह, कुलाधिपति, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, नोएडा एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सम्मेलन को संबोधित करते हुए युवाओं से जीवन में अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टि अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से समय के सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति निष्ठा को सफलता की कुंजी बताते हुए इच्छाओं को सीमित रखने पर बल दिया। “विवेक और वैराग्य” के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि चरित्रवान व्यक्ति अकेले भी एक सेना के समान होता है तथा युवाओं को भ्रमित करने वाली प्रवृत्तियों से दूर रहकर अपने समय और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में प्रो. गिरिश्वर मिश्रा, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से अस्थिर और अराजक होती जा रही है, ऐसे समय में वैश्विक कल्याण, सतत विकास और डिजिटल सजगता जैसे विषयों पर चर्चा अत्यंत प्रासंगिक है। महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रेम, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देती है तथा विविधता को शक्ति के रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देती है। अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन के उद्घाटन सत्र में बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो. राजाराम शुक्ल, पूर्व कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी ने भारतीय परंपरा की गहराई और उसके आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान और करुणा के सतत प्रवाह की संस्कृति है। उन्होंने कहा कि जैसे एक दीपक दूसरे दीपक को प्रज्वलित करता है, उसी प्रकार गुरु से शिष्य तक ज्ञान का प्रसार समाज को आलोकित करता है। उन्होंने महाभारत और रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन ग्रंथों में निहित जीवन मूल्य आज भी समाज को सही दिशा देने में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
उद्घाटन सत्र के क्रम को आगे बढ़ाते हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए एस.एम.एस. वाराणसी के निदेशक प्रो. पी. एन. झा ने कहा कि संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी सदैव सजग और प्रतिबद्ध रहा है। प्रो. झा ने यह कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ज्ञान-विमर्श और शोध के नए आयामों को समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं, जिससे परंपरागत भारतीय ज्ञान और आधुनिक वैश्विक दृष्टिकोण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इस अवसर पर आध्यात्मिकता: वैश्विक कल्याण, सततता और डिजिटल सजगता के लिए एक सिद्ध प्रतिमान पर आधारित स्मारिका का भी विमोचन किया गया । इस दौरान पिछले वर्ष आयोजित बारहवें अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस पर आधारित पुस्तक का भी अनवारण हुआ । उदघाटन सत्र का संचालन सह-संयोजक प्रो० पल्लवी पाठक ने व धन्यवाद ज्ञापन कॉन्फ्रेंस के संयोजक प्रो० अमिताभ पांडेय ने दिया।  दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन अलग अलग तकनीकी सत्रों का आयोजन भी हुआ जिसमें देश-विदेश से आये लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किया । इस अवसर पर एस०एम०एस०, वाराणसी के अधिशासी सचिव डॉ० एम० पी० सिंह, निदेशक प्रो. पी. एन. झा, कुलसचिव श्री संजय गुप्ता, प्रो० संदीप सिंह, प्रो० अविनाश चंद्र सुपकर सहित समस्त अध्यापक और कर्मचारी गण उपस्थित रहे।