JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में विश्व मृदा दिवस 2025 के अवसर पर “स्वस्थ मिट्टी, स्वस्थ शहर थीम के अंतर्गत शुक्रवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक शोध डॉ. सुशील कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही मिट्टी की दीर्घकालिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। अत्यधिक रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की सेहत कमजोर हो रही है, जबकि गोबर खाद और जैविक इनपुट्स फसलों को अधिक पौष्टिक और मजबूत बनाते हैं। दलहनी फसलों को “खेती के डॉक्टर” बताते हुए उन्होंने कहा कि अरहर जैसी गहरी जड़ वाली फसलें मिट्टी की संरचना सुधारने के साथ जलवायु संतुलन में भी अहम भूमिका निभाती हैं। फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती से भोजन की गुणवत्ता और मिट्टी की उर्वरता दोनों में वृद्धि होती है। कृषि संकाय विभागाध्यक्ष एवं मृदा संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. योगेश्वर सिंह ने कहा कि “फसल उतनी ही स्वस्थ होगी, जितनी मिट्टी स्वस्थ होगी।” उन्होंने पराली जलाने और रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के सूक्ष्मजीवों के नष्ट होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि यही सूक्ष्मजीव मिट्टी के “इंजन” हैं, जो पोषण चक्र और उत्पादकता को चलाते हैं। अवशेष मल्चिंग व फसल चक्र अपनाने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ता है, जिससे जलधारण क्षमता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है। मृदा वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने मृदा स्वास्थ्य के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों से हर वर्ष मिट्टी परीक्षण कराने की अपील की और कहा कि जैसे मनुष्य अपनी सेहत का मेडिकल टेस्ट कराता है, वैसे ही मिट्टी का स्वास्थ्य परीक्षण भी आवश्यक है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग द्वारा झांसी तथा चिरगांव–निवाड़ी क्षेत्र के 10 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए गए। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रमाणन प्रणाली को आवश्यक बताया, ताकि किसान अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम में पोस्टर प्रतियोगिता व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में मनीषा (बीएससी कृषि) ने प्रथम, एलिसा ने द्वितीय और साक्षी अग्रवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में हर्ष (उद्यान विज्ञान) प्रथम, आयुषी द्वितीय तथा राहुल और इतरीश संयुक्त रूप से तृतीय रहे। सभी विजेताओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न ग्रामों से आए महिला एवं पुरुष किसान, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, शिक्षक, पीएचडी स्कॉलर एवं एमएससी कृषि के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।







