अपनी चहक व कलरव से वातावरण को करती है आनंदित
PRATAPGARH NEWS: गौरैया नन्ही चिड़िया एक ऐसी विलुप्त हो रही प्रजाति है। जिसे बचाए रखने की हम सबके सामने चुनौती बन गई है। अगर इसे बचाए ना गया तो यह इतिहास के पन्नों में ही सिमटकर ही रही जाएगी। गौरैया के मधुर कलरव से अंतर्मन के साथ आसपास का वातावरण भी अनंत सकारात्मकता से भर जाता है। हम सबके घर-आंगन में चहकने व फुदकने वाली प्यारी गौरैया का अस्तित्व संकट में है। उक्त विचार विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर गौरैया बचाओ आयोजित कार्यक्रम में मां ज्वालामुखी देवी मंदिर ट्रस्ट मनिकपुर सचिव डॉक्टर विजय यादव अपने संबोधन में उक्त उद्गार व्यक्त कर रहे थे। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम सब अत्यंत प्यारी तथा नन्ही चिड़िया के संरक्षण का संकल्प लें। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसकी चहचहाट को सुन सके। अन्यथा आने वाली पीढ़ियां इस विलुप्त हो रही प्रजाति को सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही पढ़कर जानकारी प्राप्त करेगी। आइए हम सब संकल्प लें, कि हम सब अपने घरों के आस-पास पेड़ों पर उसके रहने के लिए घोंसला बनाकर अपनी छतों पर दाना पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जिससे घरों के अंदर उसकी फुदक-फुदक कर चलने व चहचहाने की की आवाज सुनकर अंतर मन को आनंदित करे। ऐसा करके हम प्रकृति को बचाने का हम छोटा सा प्रयास अवश्य कर सकते हैं।







