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विघुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले 280 वे दिन भी जारी रहा धरना प्रदर्शन

VARANASI NEWS: विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले  बनारस के बिजलीकर्मियों ने आज  280वें दिन बिजली के निजिकरण का विरोध करते हुये  कॉर्पोरेट घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी से निजीकरण का निर्णय निरस्त कराने का किया मांग साथ ही ऊर्जा प्रबन्धन से संघर्ष समिति  ने निजीकरण पर  उठाए पांच सवाल।
वक्ताओ ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजी घरानों से मिली भगत और बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए। वक्ताओ ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी। इसे देखते हुए संघर्ष समिति ने प्रारंभिक तौर पर ही निजीकरण के  सारे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। समिति ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने वाली सबसे बड़ी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया से भी इस बाबत विचार विमर्श किया। विस्तृत विचार विमर्श के बाद ऐसे तथ्य सामने आए  हैं जिससे ऐसा लगता है कि निजीकरण के मामले में बहुत बड़ा घोटाला और भ्रष्टाचार होने जा रहा है। संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए।
  पहला बिंदु

विगत नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की मीटिंग है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि यही  तैयार की गई थी। इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली  बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई है। निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया।
 दूसरा  बिन्दु

ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही  झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
  तीसरा बिंदु

बिडिंग हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग  डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना जा रहा है जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी कीआपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
 चौथा बिंदु

यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में  कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर काम किया जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने हाल ही में तीसरी बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है जिसमें उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं।
पांचवा बिंदु

यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल पूर्व निर्धारित निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी के आधार पर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी। संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने कहा कि यह सब बहुत ही गंभीर मामला है। उत्तर प्रदेश में बिजली की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को लूट से बचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को तत्काल हस्तक्षेप कर सारी प्रक्रिया रोकनी चाहिए और चल रहे घोटाले की उच्च स्तरीय सीबीआई कराई जानी चाहिए। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता, व्हीसल ब्लोअर, सरकारी कर्मचारी, राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन सब मिलकर निजीकरण के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते रहेंगे। निजीकरण के विरोध में अभियान और संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता।  सभा को ई0 मायाशंकर तिवारी,ई0एस0के0सिंह, ओ0पी0सिंह, ई0नीरज बिंद, जिउतलाल, राजेंद्र सिंह,अंकुर पाण्डेय, कृष्णा सिंह, बंशीलाल, रोहित कुमार,अरुण कुमार, रमेश कुमार, संजय गौतम, विवेक कुमार,अनिल यादव, रमाकांत पटेल,ब्रिज सोनकर,प्रवीण सिंह, अरविंद कौशदन, अनुराग मौर्य आदि ने संबोधित किया।