LUCKNOW NEWS: बांदा सदर से समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय सचिव नीलम गुप्ता ने मनरेगा का नया नाम लाने का जो प्रस्ताव है उसमें उन्होंने तीखा व्यंग किया। अब इस योजना को ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ के नाम से जाना जाएगा. इसके तहत ग्रामीण भारत के हर गरीब परिवार को साल में गारंटी 125 दिन का रोजगार दिए जाने का प्रस्ताव है क्या नाम बदलने से मजदूर भाइयों पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने इसकी विस्तार से चर्चा किया जाब कार्ड दुबारा बनाना होगा, प्रचार में खर्च करना होगा , हर जगह नाम बदलने होगे इन सब पर करोड़ों खर्चा होगे जहां रुपया डालर के मुकाबले गिरता जा रहा है और भारत की स्थिति दयनीय होती जा रही है वहीं जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा वर्तमान सरकार बर्बाद कर रही है। मनरेगा में लगभग 25 करोड़ कार्ड बने हुए है उन्हानें कहा कि दुनिया की सबसे बडी सोशल सिक्योरिटी स्कीम है इसमें ढाई लाख गांव और सात हजार से अधिक ब्लॉक है अगर कुछ भी बदला तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।नीलम गुप्ता ने कहा कि मैं इसका विश्लेषण करती हूं और इस आधार पर बहुत अधिक पैसा खर्च होगा मान लिजिए कि एक लेमिनेटेड कार्ड की प्रिंटिंग और वितरण की लागत मात्र 15 रुपए भी है तो 25 करोड़ कार्ड का खर्चा आप इसका अंदाजा लगा सकते है। आज मनरेगा पूरी तरह डिजिटल है इसका सॉफ्टवेयर दुनिया के सबसे जटिल डेटाबेस में से एक है सब कुछ बदलना होगा इसका एक उदाहरण मै देती हूं 2014 में निर्मल भारत को स्वच्छ भारत मिशन बनाया तो पुराने लोगों और नाम वाली प्रचार सामग्री बेकार हो गई और ब्रांडिंग में 500 करोड़ खर्च हुए । इसलिए मेरा मानना है कि इसमें सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए जिससे देश का विकास हो।







