KAUSHAMBI NEWS: उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जिले की आशा बहू एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर मंगलवार को मुख्यालय स्थित डायट मैदान में प्रदर्शन करते हुए जिलाधिकारी डा अमित पाल एवं समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष दया शंकर यादव एवं स्नातक एमएलसी के प्रतिनिधि रईस अहमद को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान आशा वर्कर्स के कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं, बावजूद इसके उन्हें समय पर मानदेय और प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही है।ज्ञापन में प्रमुख रूप से वर्ष 2025 के कई महीनों से लंबित आधार प्रोत्साहन राशि, राज्य वित्त प्रतिपूर्ति राशि तथा विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों—जैसे टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और विशेष सर्वे अभियानों—में किए गए योगदान के भुगतान की मांग की गई। यूनियन ने स्पष्ट किया कि कई कार्यकर्ताओं को वर्षों से प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। मांग की गई कि 30 अक्टूबर तक सभी लंबित प्रोत्साहन राशियों का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।इसके अलावा ज्ञापन में आशा एवं आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक की श्रेणी से हटाकर 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई गई। यूनियन का कहना है कि आशा कार्यकर्ता नियमित रूप से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन करती हैं, इसलिए उन्हें कर्मचारी का दर्जा, निश्चित वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।ज्ञापन में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों को भी प्रमुखता से रखा गया। इसमें आशा एवं आशा संगिनी को ईपीएफ और ईएसआई का सदस्य बनाए जाने, सेवानिवृत्ति के समय ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करने, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा लागू करने की मांग शामिल है। यूनियन ने कहा कि सीमित आय और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने के बावजूद उन्हें कोई स्थायी सुरक्षा नहीं दी जा रही है।आशा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन देने की अपील की। साथ ही समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष से भी आग्रह किया गया कि वे इन मांगों को शासन स्तर तक मजबूती से उठाएं। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो आशा कार्यकर्ता आंदोलन के लिए मजबूर होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर गीताजलि पाल, मंजू देवी, मीरा देवी, नीलम विश्वकर्मा, सरोज देवी, रीता कुशवाहा आदि सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।







