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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित ‌‌शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर विजयदशमी उत्सव एवं पथ संचलन व शस्त्र पूजन का कार्यक्रम संपन्न

PRATAPGARH NEWS: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ हौसिला प्रसाद ने किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रतापगढ़ विभाग के विभाग प्रचार प्रमुख प्रभा शंकर पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं आज पूरा राष्ट्र शताब्दी वर्ष मना रहा है ‌ अनादि काल से हिंदू समाज अनंत एवं अविस्मरणीय यात्रा में साधना रत रहा है, जिसका उद्देश्य मानव समाज का कल्याण रहा है। भारतवर्ष अपनी प्राचीन संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के चलते संपूर्ण विश्व का निर्माण करने के लिए सदैव अग्रणी भूमिका में रहा है। समाज में समरसता आपस में सद्भाव की भावना बनी रहे और हिंदू समाज संगठित होकर राष्ट्र के विकास में सहायक सिद्ध हो सके, यही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का परम उद्देश्य है। आज हम सबको समाज में विद्यमान तमाम असमानताओं एवं रावण रूपी बुराइयों को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित होना चाहिए, क्योंकि विजयदशमी का पर्व हमें यह शिक्षा देता है की राष्ट्र का विकास तभी हो सकता है जब उस राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति अपनी संस्कृति और संस्कार से अपनी दिनचर्या का क्रियान्वयन करें जिस प्रकार भगवान राम ने रावण की राक्षसी प्रवृत्ति को समाप्त करके ऋषियों ,मुनियों की तप, साधना को बाधा रहित किया। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी आज समाज में आपसी भेदभाव को भूल करके राष्ट्रवादी समरसता की भावना की विचारधारा बलवती होनी चाहिए, तभी राष्ट्र पूरे विश्व को दिशा देने में समर्थ होगा।
आगे अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन ,पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण और नागरिक कर्तव्य जैसे पंच प्रण से ही एक मूल्यवान परक समाज की स्थापना हो सकती है, जिससे राष्ट्र सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक सभी दृष्टियों से समृद्ध हो सकेगा। चारों ओर वातावरण में एक विश्व व्यापी समस्या है ,जिसका अनुभव समाज का हर प्राणी करता है और अपने राष्ट्र में भी हो रहा है ,पर्यावरण समाज का एक ऐसा कारक है क्योंकि यदि स्वस्थ पर्यावरण होगा तो समाज स्वस्थ होगा यदि अस्वस्थ  पर्यावरण होगा तो समाज भी अस्वस्थ होगा। जिससे सामाजिक उन्नति बाधित होगी। इस प्रकार  प्रकृति से लेकर  संस्कृति तक के सभी पर्यावरण स्वस्थ और परिष्कृत होने चाहिए। समाज की अभिव्यक्ति का दूसरा अहम पहलू है हम सब का सामाजिक व्यवहार जब हम एक साथ और एक समाज में रहते हैं तो हम सब का यह धर्म होना चाहिए कि समाज एवं विधि द्वारा प्रदत्त नागरिक अनुशासन का हम पालन करें और वसुधैव कुटुंबकम की भावना से प्रेरित होकर राष्ट्र की समस्त संस्कृति को अपनी संस्कृति समझे और अनुशासन में रहकर जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या का निर्वहन करता है तो राष्ट्र उन्नत के पथ पर सदैव अग्रसर होता रहता है।
हमें मन वचन कर्म से अपने राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं का उपयोग करें जो देश की उन्नति में बाधक हो उसका तिरस्कार करें और अपने अंदर वैचारिक रूप से स्व की भावना इस प्रकार से परिलक्षित होनी चाहिए, जिससे राष्ट्र का प्रतिबिंब झलकता हो। सभी क्षेत्रों में राष्ट्र अपना स्वावलंबी बने और हम सब का व्यवहार सभी के प्रति सरल एवं सुखदाई हो तभी देश उन्नति के पथ पर आगे बढ़ सकता है और यह राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त करने में सफल होगा। इस अवसर पर माननीय खंड संघचालक कृष्ण देव जी, खंड कार्यवाह रवि जी ,सह खंड कार्यवाह आशीष जी ,जिला सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख आशीष शुक्ला, वेद, नवीन बजरंगी ,डॉक्टर हौसिला प्रसाद, विद्यासागर ,प्रवीण ,बृजेश गिरी, सज्जन लाल ,लालता प्रसाद, शैलेंद्र ,अरविंद कुमार, वेद प्रकाश, हर्ष देव सिंह आदि उपस्थित रहे।