दीक्षांत अंत नहीं, राष्ट्र निर्माण का प्रारम्भ है:शिवराज सिंह चौहान
बुंदेलखण्ड में आएगी तिलहन-दलहन क्रांति : डॉ एमएल जाट
JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह ऐतिहासिक गरिमा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री भारत सरकार श्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत माता की जय” एवं “झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई की जय” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की और 365 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की, जबकि 15 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि “दीक्षांत समारोह जीवन का अंत नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के नए अध्याय का प्रारम्भ है।” उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक सम्मान प्राप्त कर रहा है और अब युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने ज्ञान, कौशल और संस्कार से देश और अपनी संस्था का नाम रोशन करें। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य और शिष्य परंपरा का उदाहरण देते हुए सत्यनिष्ठा और समर्पण का संदेश दिया तथा के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में असीम क्षमता है, आवश्यकता केवल लक्ष्य निर्धारित कर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की है। केंद्रीय मंत्री ने देश की खाद्य सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत किसी भी देश पर खाद्यान्न के लिए निर्भर नहीं है, इसका श्रेय कृषि वैज्ञानिकों और परिश्रमी किसानों को जाता है। उन्होंने ‘पोषणयुक्त भारत’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि उत्पादन के साथ गुणवत्ता और पोषण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकार उर्वरक सब्सिडी को पारदर्शी बनाने हेतु किसानों के खातों में सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण की दिशा में कार्य कर रही है। अब तक 8.5 करोड़ किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है और 12 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। “भारत विस्तार प्लेटफॉर्म” के माध्यम से किसानों को फसल संबंधी समस्त जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है।
श्री चौहान ने कहा कि बुंदेलखण्ड की धरती दलहन क्रांति का केंद्र बन सकती है। भारत को ‘फूड बास्केट’ बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब वैज्ञानिक प्रयोगशाला से खेत तक ज्ञान पहुंचाएं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं और सभी से अपने जन्मदिवस पर एक पौधा लगाने का आह्वान किया। कृषि मंत्री ने विवि में आज स्टेनिया नट का पौधा लगाया। विशिष्ट अतिथि महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं सचिव डेयर डॉ. एमएल जाट ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्त्व की संस्था बताते हुए कहा कि यह प्रतिदिन नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि झाँसी क्रांति की धरती है और अब यहाँ तिलहन एवं दलहन की नई कृषि क्रांति का सूत्रपात होगा।
डॉ. जाट ने विकसित भारत के निर्माण में बौद्धिक संपदा, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका पर प्रकाश डाला। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में मात्र 5 विद्यार्थियों से प्रारम्भ हुआ यह विश्वविद्यालय आज 1100 विद्यार्थियों के साथ निरंतर प्रगति कर रहा है, इसमें छात्राओं की संख्या सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ किसानों के लिए तकनीकी परामर्श, प्रशिक्षण एवं नवाचार का केंद्र बन चुका है। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पॉलीहाउस, हाई-टेक नर्सरी, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, कठिया गेहूँ, सरसों एवं चना प्रक्षेत्र, फसल कैफेटेरिया जैसे नवाचार स्थापित किए हैं। समारोह में 235 स्नातक, 127 परास्नातक एवं 3 पीएच.डी. सहित कुल 365 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। 8 स्नातक, 7 परास्नातक एवं 3 पीएच.डी. विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वंदेमातरम् से हुआ। मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण किया तथा एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कृषि विज्ञान मंडपम सहित विभिन्न नवीन भवनों का लोकार्पण भी किया गया।
कृषि मंत्री ने विवि प्रक्षेत्र में किसान चौपाल के माध्यम से किसानों से संवाद किया।
मंचासीन अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान,सांसद झांसी ललितपुर अनुराग शर्मा, नगर विधायक रवि शर्मा, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद/ सचिव डेयर डॉ एमएल जाट, कुलपति डॉ अशोक कुमार सिंह. सामोरह में पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रवींद्र शुक्ला, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कुलपति डॉ मुकेश पांडे, विधायक गरौठा जवाहरलाल राजपूत, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता,एमएलसी रमा निरंजन, अन्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के भाजपा जनप्रतिनिधि, विवि बोर्ड मेम्बर, अकादमिक सदस्य,विवि के सभी अधिकारी वैज्ञानिक, शोधार्थी, किसान एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे परिसर में उत्सव और गौरव का वातावरण व्याप्त रहा।
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