फतेहपुर में बजट पर नाराज़गी, जनता बोली – फिर छूट गया हमारा जिला
पत्रकारों, किसानों और मजदूरों के लिए बजट में ठोस सुरक्षा नीति का अभाव
ट्रॉमा सेंटर, विश्वविद्यालय, रोजगार और उद्योग को लेकर लोगों की उम्मीदें अधूरी
FATEHPUR NEWS: (शीबू खन) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट 2026–27 को लेकर फतेहपुर की जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां सरकार इसे विकासोन्मुख और जनकल्याणकारी बता रही है, वहीं आम नागरिकों का कहना है कि जिले से जुड़ी बुनियादी समस्याओं पर इस बार भी ठोस और स्पष्ट घोषणाएं नहीं की गईं। जिले के लोगों को इस बजट से विशेष तौर पर बेहतर ट्रॉमा सेंटर, आधुनिक सरकारी अस्पताल, उच्च शिक्षा के लिए पूर्ण विकसित विश्वविद्यालय, नए उद्योग, रोजगार के अवसर और शहरी समस्याओं जैसे ट्रैफिक जाम, सीवर और कूड़ा निस्तारण के स्थायी समाधान की उम्मीद थी। लेकिन बजट में प्रदेश स्तर की योजनाओं का जिक्र तो हुआ, पर फतेहपुर के लिए कोई बड़ी और विशेष परियोजना सामने नहीं आई। बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जिल के नामचीन वरिष्ठ अधिवक्ता जावेद खान ने कहा कि बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं पर ध्यान देना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर गरीबों, श्रमिकों, किसानों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों को वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा, इस पर सरकार को और स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में आज भी बड़ी आबादी न्याय तक पहुंच से वंचित है। मुफ्त कानूनी सहायता, लोक अदालतों की संख्या बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक सहायता केंद्रों को मजबूत करने और न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान होने चाहिए थे। इसी कड़ी में जिले की नामचीन महिला शिक्षिका आशिया फारूकी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई हैं, शिक्षा खर्च में वृद्धि स्पष्ट हैं बजट 2026 में AI डिजिटल शिक्षा और लैब्स का विस्तार शामिल हैं , यह टीचिंग लर्निंग को और बेहतर, रोचक व आधुनिक बनाएगा। टेक्नोलॉजी और AI आधुनिक शिक्षा की ओर क़दम हैं। शिक्षकों को नए तरीक़े से सिखाने का अवसर मिलेगा। निश्चित तौर पर बजट का धन तो बढ़ा हैं परंतु देश भर में समान रूप से सुविधाएं पहुंचना चुनौती हैं। जैसे नगर क्षेत्र में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता, बिजली की पर्याप्त सुविधा, समय – समय पर प्रशिक्षण यह बजट योजनाएं तभी असरदार होंगी जब ज़मीन स्तर पर सही तरीक़े से लागू की जाएं। केवल पैसा देना पर्याप्त नहीं, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण, स्कूल उपकरण और शिक्षक छात्र अनुपात पर भी ध्यान देना ज़रूरी हैं। इसके साथ – साथ कृषि सुधार, महिला स्वावलंबन, युवा विकास एवं रोज़गार सृजन पर भी ध्यान अपेक्षित हैं। यही आशा करते हैं कि ये योजनाएं समय से लागू हों और सभी प्रदेश और जनपद में बराबर प्रभाव दिखाएं। इन सबके बीच पत्रकारों एवं कलमकारों के हित में काम करने वाली संस्था साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शहंशाह आब्दी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर बजट में कोई ठोस नीति नहीं दिखती। जो पत्रकार जनहित की आवाज उठाते हैं, वही आज सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। उनके लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और कानूनी संरक्षण जैसी योजनाएं बजट का अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए थीं, सरकार यदि वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, तो बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज न होकर गरीब, मजलूम और पत्रकार जैसे वर्गों के लिए सुरक्षा कवच बनना चाहिए। सरकार को चाहिए कि बजट की समीक्षा करते हुए सामाजिक न्याय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय तक समान पहुंच को प्राथमिकता दे, तभी यह बजट वास्तव में जनहितकारी कहलाएगा। वहीं फतेहपुर जनपद की खागा तहसील में बतौर अधिवक्ता एवं आरटीआई विशेषज्ञ के रूप में जनहित में कार्य करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सूर्य प्रकाश सिंह ने कहा कि यह बजट आम जनता के साथ “छलावा” है, बजट जनता की वास्तविक समस्याओं से ज्यादा कॉरपोरेट हितों और पूंजीवादी व्यवस्था को मजबूत करने का दस्तावेज बनकर रह गया है। सरकार ने बजट को विकास का नाम दिया है, लेकिन इस तथाकथित विकास का लाभ मुट्ठीभर बड़े उद्योगपतियों और निजी कंपनियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि गांव, किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा और निम्न आय वर्ग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। बजट में बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, एक्सप्रेसवे, स्मार्ट सिटी और निजी निवेश को बढ़ावा देने की घोषणाएं तो हैं, लेकिन इनके समानांतर न तो न्यूनतम मजदूरी में ठोस बढ़ोतरी दिखाई देती है और न ही किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की कोई स्पष्ट नीति सामने आती है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों में निजीकरण को बढ़ावा देना सीधे तौर पर गरीबों को इन सुविधाओं से और दूर करने का संकेत है।
कुल मिलाकर बजट को लेकर फतेहपुर की जनता में संतोष से ज्यादा सवाल नजर आ रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि राज्य स्तर की योजनाएं जरूरी हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि फतेहपुर जैसे जिलों के लिए भी स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और शहरी ढांचे को लेकर सीधी और ठोस घोषणाएं की जाएं, ताकि विकास केवल कागजों तक सीमित न रह जाए बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे।







