JHANSI NEWS: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जनवरी 2026 में अधिसूचित यूजीसी रेगुलेशन , एक्ट 2026 के विरोध में सवर्ण समाज ने कड़ा ऐतराज जताया है। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर उक्त कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। वही राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ क़े जिलाध्यक्ष ऋषिकेश रावत (मुखिया ) एवं महानगर अध्यक्ष पं. डॉ. विवेक बाजपेई ने संयुक्त रूप से कहा कि यह अधिनियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें केवल एससी, एसटी, ओबीसी एवं दिव्यांग वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर बल दिया गया है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। उन्होंने बताया कि कानून के अंतर्गत गठित की जाने वाली इक्विटी कमेटियों में सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है तथा झूठी शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे शैक्षणिक परिसरों में भय और असंतोष का माहौल बन रहा है। नेतृत्वकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा के मंदिर में सभी छात्र समान होते हैं और किसी भी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलित कानून संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो सवर्ण समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से देशभर में आंदोलन करेगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह मंत्री, कानून मंत्री एवं शिक्षा मंत्री को भी भेजी गई है। इस दौरान गौरव तिवारी, दीपक त्रिपाठी, लोजपा पार्टी क़े प्रदेश उपाध्यक्ष अंशु बुधौलिया, नीरज दुबे, सचिन मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे.







