AURAIYA NEWS: जनपद के दक्षिणी छोर पर बहने वाली यमुना नदी का जलस्तर स्थिर होने पर नदी से सटे वाशिंदों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन पूरे प्रदेश के अलावा राजस्थान और हरियाणा प्रांतों में लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते यहां यमुना नदी के जलस्तर ने एक बार फिर उछाल मारना शुरू कर दिया है। जिससे यमुना तटीय कई गांवों के निवासियों में चिंता की लकीर साफ देखी जा सकती है। हालांकि प्रशासन लगातार बाढ़ की स्थितियों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार सभी जरूरी इंतजामात करा रहा है। औरैया इटावा जालौन एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर यमुना,चंबल, सिंध क्वारी और पहुंज जैसी पांच नदियों का महासंगम होता है। इन चारों नदियों के मिल जाने के साथ ही यमुना नदी औरैया जिले में प्रवेश करते हुए जिले के दक्षिणी छोर पर औरैया सदर एवं अजीतमल तहसील क्षेत्र में प्रवाहित होती हैं। यहां अजीतमल के जुहीखा,बीझलपुर,सिकरोडी जैसे करीब दिए दर्जन गांव नदी के किनारे बसे हैं तो वहीं औरैया के मई, नोरी, अस्ता, क्योंटरा, मढ़ापुर जैसे करीब एक दर्जन गांव नदी से सटे हुए बसे है। अधिकांश वर्षों में हरियाणा के हथिनी कुंड बांध से यमुना नदी में तथा कोटा बैराज से चंबल नदी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ दिया जाता है। वही जनपद से निकलते ही कानपुर देहात और जालौन की सीमा में बेतवा नदी के पानी का पलटा भी यमुना नदी पर होता है।जिसका सीधा प्रभाव यहां जनपद में बहने वाली यमुना नदी पर बाढ़ के रूप में दिखाई देता है। साल 2023 और उससे पहले 2022 में यहां बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई थी कि उसका दंश आज तक बाढ़ प्रभावित लोग भूल नहीं पाए हैं। 2022 में जहां यमुना नदी का जलस्तर 117 मीटर तक पहुंच गया था तो ठीक अगले वर्ष जब लोग ठीक से उबर भी नहीं पाए थे तभी 2023 में जूहीखा एवं शेरगढ़ घाट पर नदी के जलस्तर ने दशकों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। 2023 में यहां अभी तक का सबसे ज्यादा जलस्तर 119 मीटर दर्ज किया गया था। बाढ़ का खौफनाक मंजर कुछ ऐसा था कि दर्जनों गांव पूरी तरह पानी में डूब गए थे, सिर्फ अंदाज लगाया जा सकता था कि इस जगह पानी के नीचे यह गांव हो सकता है। कई गांव का संपर्क मार्ग टूट गया,कई लोग बेघर हो गए, खाने पीने व बीमारियों से बचने के लिए दवाइयां के अलावा अपने जानवरों के चारा पानी के लिए भी मोहताज दिखाई दिए। करीब एक सप्ताह तक यमुना नदी ने समंदर सा स्वरूप धारण रखा, जिसकी चपेट में जो भी आया बर्बाद हो गया। अब इस बार भी जब एक हफ्ते पहले कोटा बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़ा गया था तो यमुना नदी का जलस्तर भी बढ़कर 104 मीटर तक पहुंच गया था जो करीब 36 घंटे बढ़ाने के बाद स्थिर हो गया था। हालांकि औरैया शेरगढ़ घाट पुल पर यह चेतावनी बिंदु 112 मी. तथा खतरे के निशान 113 मी. से काफी नीचे था लेकिन फिर भी लोगों में बेचैनी बढ़ने लगी थी। एक सप्ताह बाद आज यमुना नदी का जलस्तर धीरे-धीरे फिर बढ़ने लगा है। सोमवार को नदी का जलस्तर 106.19 मीटर दर्ज किया गया। यहां प्रशासन लगातार अलर्ट मोड पर बना हुआ है। वह बाढ़ और उससे निपटने के लिए लगातार स्थितियों पर अपनी नजर जमाये हुए हैं। हर तरह की जरूरी व्यवस्थाएं जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। इस संबंध में जिलाधिकारी डॉ.इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि लोगों को किसी तरह से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई है। छोटी बड़ी नावों की व्यवस्था भी प्रशासन द्वारा कराई गई है। जिलाधिकारी श्री त्रिपाठी ने अफवाहों पर ध्यान न देने और बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासनिक एडवाइजरी पर अमल करने की अपील भी की है।







