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मेरी पंचायत ऐप’ से खुला सराएं इदरीस पंचायत का भ्रष्टाचार, 70 लाख गबन की जांच की मांग

ग्रामीणों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, पंचायत राज अधिनियम और मनरेगा नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप

FATEPUR NEWS: जनपद के ऐरायां ब्लॉक की ग्राम पंचायत सराए इदरीस में ग्रामीणों ने 70 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर हुए कार्यों की वास्तविकता उजागर करने के लिए मेरी पंचायत ऐप का सहारा लिया और पाया कि सरकारी फंड कागजों में खर्च दिखाकर हड़प लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सीधा-सीधा उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 और मनरेगा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत रिकार्ड में बारातशाला की बाउंड्री, हैंडपंप की मरम्मत, नाली-खड़ंजा निर्माण, रिक्शा खरीदी, सफाई के नाम धन का निकलना, वाटर कूलर और समरसेबल पर खर्च, चूना और ब्लीच छिड़काव के नाम पर और मूलभूत सुविधाओं पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। लेकिन हकीकत यह है कि गांव में न तो कोई बाउंड्री बनी और न ही हैंडपंपों की मरम्मत हुई। कई हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं और ग्रामीण पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। बीसुई गांव के निवासी फूलचंद्र ने बताया –”हमारे गांव की गलियां आज भी दलदल जैसी हैं। नाली-खड़ंजा के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए, लेकिन आज तक ईंट तक नहीं डली। यह खुला भ्रष्टाचार है, हम लोगों ने मेरी पंचायत ऐप से कामों की सूची निकाली तो चौंक गए। कागजों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन गांव में कहीं कोई काम नहीं है।”
नियम-कानून का हवाला
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 15(1) के अनुसार ग्राम पंचायत के कोष का उपयोग केवल जनता के हित और विकास कार्यों में होना चाहिए।
मनरेगा अधिनियम की धारा 19 और 23 में स्पष्ट है कि सभी कार्यों का सोशल ऑडिट अनिवार्य है और किसी भी शिकायत पर डीएम स्तर से जांच कराई जानी चाहिए।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत यदि सरकारी धन का दुरुपयोग या गबन सिद्ध होता है तो जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस घोटाले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच सही ढंग से की गई तो करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। गांव के कई बुजुर्ग लोगों ने कहा कि “सरकार गरीबों के लिए पैसा देती है, लेकिन गांव में उसका एक रुपया भी नहीं पहुंचता। हम लोग मांग करते हैं कि इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए।”