PRATAPGARH NEWS: ऐतिहासिक बाबा देवघाट महादेवन धाम देवघाट मोहनगंज एएसपी प्रशान्त राज और नायब तहसीलदार देवस्थल पहुंचे। एक पक्ष के पंजीकृत सोसाइटी के महंत पुजारी रामानन्द गिरी ने बताया कि हमारी संस्था 2007 में बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान के नाम से पंजीकृत हुई थी जिसका पंजीयन संख्या ए एल 22691 है। यही संस्था मंदिर की देखरेख, पूजा आरती, साफ सफाई एवं मंदिर का विकास कार्य करती थी। इस संस्था में कुल तेरह सदस्यों में से बारह सदस्य एवं पदाधिकारी गोसाई जाति के है जिनकी भूमिधरी जमीन में ऐतिहासिक शिव मंदिर व मेला की जमीन स्थित है। जब की आपत्तिकर्ता की कमेटी में सभी बाहरी है जिनमें से अधिकतर लोग भूमाफिया है। मंदिर को कब्जाने के लिए संस्था बनाई थी। तीन माह पुरानी संस्था बने होने के नाते सोसाइटी द्वारा नाम संशोधन करने की नोटिश भेजी गई थी। जिसके क्रम में देवस्थान का प्राचीन नाम बाबा देवघाट महादेवन धाम से पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग की गई थी। जिसका नाम संशोधन कर के जनवरी 2026 में सहायक रजिस्ट्रार द्वारा पंजीयन प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। वहीं दूसरे पक्ष से बृजेश कुमार गिरी जो कि 307 जैसे संगीन जुर्म का आरोपी अपने आपको महंत पुजारी बताते हुए बताया कि मेरा 2020 में बाबा बालुकेश्वर नाथ चैरिटेबल ट्रस्ट भरत धाम के नाम से ट्रस्ट है। इसी ट्रस्ट के माध्यम से तीन साल से हम मंदिर की पूजा पाठ कर रहे है। इसलिए मंदिर के असली महंत पुजारी हम है। वहीं मंदिर के अन्य पुजारियों ने बताया कि बृजेश कुमार गिरी जो स्वयंभू महंत पुजारी बने हुए है मंदिर की दान पेटिका का ताला तोड़कर उसके सारे पैसे का गमन कर गए। मंदिर का तीन कुंतल से अधिक का घंटा करीब एक लाख साठ हजार रुपए का भी बेचकर बंदर बांट कर लिए है। मंदिर के विकास को आए दान के चंदे का अपने घर का निर्माण कर लिए है। पूर्व संसद संगम लाल गुप्ता के द्वारा धर्मशाला के लिए दिए गए करीब बारह लाख रुपए का धर्मशाला बनवाने के बजाय मंदिर पर व्यक्तिगत शयनकक्ष बनवा लिए जिसका सदुपयोग वह स्वयं कर रहे है। साथ ही अन्य चंदे के पैसे को डाकर गए है। मंदिर में शिवलिंग के कवच को लेकर अब तक दस किग्रा से अधिक चांदी भक्तों के द्वारा चढ़ाई गई है जिसको अपने अधीन में लेकर जब्त किए है। बताया गया कि कवच के लिए महज चार किग्रा चांदी पर्याप्त है पर दस किग्रा चांदी चढ़ने के बाद भी अभी अपर्याप्त बताया जा रहा है। पुजारी देवा गिरी महाराज ने बताया कि मंदिर के मुख्य गर्भगृह के पूजा लगातार पूर्व की बनी कमेटी द्वारा किया जाता था। इधर तीन साल से स्वयंभू बने महंत द्वारा पुजारियों को मरवा पिटवाकर उनके शै से खुद जबरिया आरती करने लगे। उनके इस अनैतिक कार्य में एक पूर्व सांसद की भी बड़ी भूमिका थी। आज हालात यह है कि सभी गोसाई जाति को मंदिर की भूमधरी हिस्सेदारों को नोटिस भेजकर जबरिया बेदखल किया जा रहा है। एएसपी एवं सीओ सिटी प्रशांतराज एवं नायब तहसीलदार सदर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोनों पक्षों से उनके द्वारा प्रपत्र को ले लिया गया है। नायब तहसीलदार द्वारा बताया गया कि दोनों पक्षों के पेपर देखने के बाद वास्तविक महंत पुजारी एवं उनकी समिति अथवा ट्रस्ट को प्रभावी करने का आदेश प्रदान किया जाएगा।







