JHANSI NEWS: जिला उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र, जो अपनी कृषि और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, अब मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। इस प्रगति के पीछे एक महत्वपूर्ण नाम है ज्ञानेंद्र सिंह, जो झांसी मंडल के उप निदेशक मत्स्य के रूप में कार्यरत हैं। ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने कुशल नेतृत्व, नवाचार और समर्पण के बल पर मंडल और जिले में मत्स्य पालन को न केवल बढ़ावा दिया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार भी बनाया है। उनके कार्यों ने न केवल स्थानीय मछुआरों की आजीविका को बेहतर किया है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया है। ज्ञानेंद्र सिंह ने अपने कार्यकाल में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं को लागू किया है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट सब्सिडी योजना, मत्स्य कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड आदि अन्य मत्स्य विकास कार्यक्रमों को झांसी मंडल में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इनसी योजनाओं के तहत, मत्स्य पालकों को तकनीकी प्रशिक्षण, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ज्ञानेंद्र सिंह ने व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित किया है कि ये सुविधाएं जमीनी स्तर तक पहुंचें और अधिक से अधिक लोग इनका लाभउठा सकें। उनके नेतृत्व में, मंडल के तालाबों और जलाशयों का उपयोग मत्स्य पालन के लिए अधिक प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। झांसी मंडल के जनपदों में बेतवा, यमुना और अन्य छोटी-बड़ी जल स्रोतों की उपलब्धता को देखते हुए, ज्ञानेंद्र सिंह ने जलाशयों के रखरखाव और उनके वैज्ञानिक उपयोग पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित किया है कि वे पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों, जैसे बायोफ्लॉक और रिसकुर्लेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम , को अपनाएं। इससे न केवल मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि मत्स्य पालकों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। ज्ञानेंद्र सिंह की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है माता सुकेत महिला सशक्तिकरण के संवर्धन योजना में उन्होंने मंडल में कई महिला योजना से मत्स्य पालन से जोड़ा है। इन समूहों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकी हैं। उनके इस प्रयास ने ग्रामीण है। क्षेत्रों में महिलाओं के बीच एक नई आर्थिक क्रांति को जन्म दिया है। इसके अलावा, ज्ञानेंद्र सिंह ने मत्स्य पालकों के लिए जागरूकता शिविर और कार्यशालाओं का आयोजन किया है, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा मछली पालन की नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी जाती है। इन शिविरों में मत्स्य पालकों को मछली की नस्ल सुधार, जल गुणवत्ता प्रबंधन, और बीमारियों से बचाव के तरीकों के बारे में बताया जाता है। इससे मछली पालन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और उत्पादन लागत में कमी आई है। ज्ञानेंद्र सिंह के प्रयासों का परिणाम यह है कि झांसी मंडल अब मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक मॉडल मंडल बन रहा है। उनके कार्यों की सराहना न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य स्तर पर भी हो रही है। उनके नेतृत्व में, झांसी मंडल के मत्स्य पालक न केवल आत्मनिर्भर हो रहे हैं, बल्कि वे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ज्ञानेंद्र सिंह का यह समर्पण और नवाचार निश्चित रूप से अन्य जिलों के लिए एक प्रेरणा है।







