नई जामा मस्जिद में उर्स-ए-आला हज़रत वा उर्स-ए-मखदूम शाह आला की रौशन महफ़िल
KANPUR NEWS: रविवार को नई जामा मस्जिद बाबूपुरवा में को उर्स-ए-आला हज़रत और उर्स-ए-मखदूम शाह आला का परवानाे-ए-नूर प्रोग्राम निहायत ही अकीदत और शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया। प्रातः 10 बजे से शुरू हुई महफ़िल में शहर और आस-पास के इलाक़ों से बड़ी तादाद में उलमा और अकीदतमंदों ने शिरकत की। मस्जिद और उसके आस-पास का इलाका रूहानी माहौल में डूबा रहा। उर्स का आगाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ जिसकी सआदत कारी अंजर रज़ा ने हासिल की। इसके बाद नात-ए-पाक की महफ़िल सजी, जिसमें हाफिज सैयद फरजान और हाफ़िज़ फ़रमान रज़ा ने अपने पर असर अंदाज़ में नात पेश कर महफ़िल को महकाया। निज़ामत के फ़राइज़ सैय्यद आमिर रज़ा ने बख़ूबी अदा किए। महफ़िल की सदारत क़ाज़ी-ए-शहर कानपुर मुफ़्ती यूनुस रज़ा ओवैसी ने की। उन्होंने अपने खिताब में कहा कि आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खाँ और हज़रत मखदूम शाह आला जैसे बुजुर्गों की ज़िंदगी हमारे लिए रौशनी का मिनार है। उनकी शिक्षा, इल्म और दीनी तालीम आज भी हमारे लिए मिसाल हैं।
डाल दी कल्ब में अज़मते मुस्तफा, सय्यदी आलाहजरत पे लाखो सलाम
खुसूसी ख़िताब हज़रत मौलाना अबरार हबीबी साहब ने किया। उन्होंने आला हज़रत और मखदूम शाह आला की तालीम पर रोशनी डालते हुए कहा कि आला हजरत एक इल्मी वा रूहानी शख्सियत के मालिक थे। ऐसे बुजुर्गों ने उम्मत को इल्म, मोहब्बत और अमन का पैग़ाम दिया। कार्यक्रम के आखिर में मुफ़्ती इरफ़ान मिस्बाही ने रूह पर असर करने वाली दुआ कराई। पूरी मस्जिद ‘आमीन’ की सदाओं से गूंज उठी।
इस मौके पर ख़ुसूसी शिरकत करने वालों में मौलाना आसिफ़ हबीबी, मौलाना इरफ़ान अमज़ादी, मौलाना मोहम्मद फ़ारूक़, सूफ़ी लाल मोहम्मद, हाफ़िज़ इरफ़ान और नई मस्जिद के सदर मुन्ना ख़ान मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल और यादगार बनाया।
प्रोग्राम के समापन पर नई जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तनवीर बिलाल ने सभी मेहमानों, उलमा-ए-किराम और अकीदतमंदों का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोग्राम हमें अपने बुजुर्गों की तालीमात और उनकी कुरबानियों को याद दिलाते हैं और नई नस्ल को सही रास्ते पर चलने की हिदायत देते हैं। इस मौके पर मस्जिद इंतजामिया ने लंगर का भी इंतजाम किया। अकीदतमंदों ने रूहानी माहौल में दुआ मांगी और अमन, तरक्क़ी व खुशहाली की इल्तिजा की।







