Home उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार के कठघरे में कैद जनपद का मण्डलीय अस्पताल

भ्रष्टाचार के कठघरे में कैद जनपद का मण्डलीय अस्पताल

MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय ) जनपद के लाखों मरीजों को जीवन देने वाला मण्डलीय अस्पताल उच्च अधिकारियों की अनदेखी के चलते पूरी तरह भ्रष्टाचार के कठघरे में कैद हो गया है और गरीब मरीजों को जीवन देने के बजाय उनका जीवन उनको स्वास्थ्य सब कुछ छीन रहा है। यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अपने को जनप्रिय मुख्यमंत्री कहलाने वाले योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक सहित तमाम जिम्मेदार मंत्री व अधिकारी इस भ्रष्टाचार पर इस कदर चुप्पी साधकर क्यों बैठे हैं? यह समझ से परे है। समाज के स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित किया है, यह काफी सोचनीय है। प्रतिदिन विभिन्न समाचार पत्रों में मण्डलीय अस्पताल के भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें नित्य प्रकाशित होने से अस्पताल प्रबन्धन बौखला गया है और अब वह अपने गुण्डों से “आईना” फोड़वाने का ही दुस्साहस कर रहा है, जो निन्दनीय ही नही अद्यम्य भी है। इसे पूरा देश जानता है कि पत्रकार जनता की आंख व कान होते हैं, जिन पर अभी भी लोगों का भरोसा बना हुआ है। ऊंचे आदर्शों की बदौलत ही “पत्रकारिता” को लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ के रूप में गरिमा मिली है। पत्रकार समाज के सजग प्रहरी हैं और अपनी लेखनी से अन्याय, अत्याचार, दुराचार, कदाचार व भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों पर चोट पहुंचाकर पीड़ितों को न्याय दिलाते हैं। विगत दिनों एक सम्मानित पत्रकार के साथ, मण्डलीय अस्पताल में चिकित्सकों के इशारे पर, अस्पताल के गुण्डे गुर्गों द्वारा खबरों से आक्रोशित होकर अभद्र व्यवहार कराया, उससे जनपद के समस्त पत्रकारों व पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है, वहीं जनपद का अधिवक्ता समाज भी आक्रोशित है और न्याय की भीख मांगते हुये अपना पत्रक भी सौंपा है। मण्डलीय अस्पताल में व्याप्त भ्रष्टाचार का विन्दु बार जिक्र किया जाय तो वह पूरी कहानी बन जायेगी, इसलिये बानगी के रूप में सिर्फ एक भ्रष्टाचार को दर्शाना उचित होगा। मण्डलीय अस्पताल से जुड़े दर्जनों नशेड़ी जो हेरोईन, अफीम, गांजा, चरस आदि के चंगुल में फंसे है, वे मण्डलीय अस्पताल में अपना खून बेचकर नशा करते हैं। नशेड़ियों द्वारा खून बेचकर नशा करने का खेल मण्डलीय अस्पताल में दशकों पुराना है। शिकाय‌तों के शासन ने इस पर रोक लगा दी थी और सिर्फ मरीज के परिजनों का ही खून लेने का निर्देश दिया था। वर्षों इसपर रोक लगी भी थी किन्तु शासन व जिम्मेदारों ने जब इस ओर से आंखे मूद लिया तो मरीजों के परिजनों का खून होना बताकर पुनः नशेड़ियों का खून लेने व उसे ऊंचे दाम पर मरीजों को बेचने का धन्धा बिना किसी भय के चालू है। जरा सोचिये, नशेड़ियों का खून जिस मरीज को चढ़ा दिया जायेगा उस मरीज की जिन्दगी व उसके स्वास्थ्य का क्या हाल होगा । अस्पताल कर्मी उन सम्मानित पत्रकार से इसलिये खार खाये बैठे थे, कि उन्होने मण्डलीय अस्पताल को आईना दिखाया और इमरजेन्सी सहित समस्त चिकित्सकों के कक्ष की फोटोग्राफी कर, जहां कक्ष से चिकित्सक नदारद थे, इसे उन्होंने अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र के जरिये जनता को रूबरू करा दिया था। बाद में अस्पताल के झूठे व गैरजिम्मेदार सी.एम.एस ने यह कहते हुये पल्ला झाड़ लिया था कि डाक्टर राउंड पर गये होगें । यदि मण्डलीय अस्पताल को सुधारना है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी व्यक्तिगत दृष्टि डालना होगा, वरना व्यवस्था रामभरोसे-चलती रहेगी ।