Home उत्तर प्रदेश भगवान भक्ति की निर्मलता को करते हैं स्वीकार:सम्पूर्णानन्द जी

भगवान भक्ति की निर्मलता को करते हैं स्वीकार:सम्पूर्णानन्द जी

पूरे मुरली अमावां में श्रीमद्भागवत कथा में श्रीराम जन्मोत्सव के प्रसंग पर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
PRATAPGARH NEWS: पूरे मुरली अमावां में हो रही श्रीमदभागवत कथा में गुरूवार को श्रीराम जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। प्रयागराज से पधारे कथाव्यास स्वामी सम्पूर्णानंद जी महराज ने कहा कि भगवान भक्ति के बंधन में सदैव उसके हृदय में निवास किया करते हैं। उन्होने कहा कि भगवान को भक्त का अनादर कभी भी स्वीकार नही होता। कथाव्यास स्वामी जी ने बताया कि भगवान श्रीराम का जन्म जगत में मर्यादा तथा नैतिकता की सुरक्षा के लिए हुआ। उन्होने कहा कि श्रीराम भक्त और भक्ति की मर्यादा के अलंकरण हैं। स्वामी सम्पूर्णानंद जी ने बताया कि भक्ति हृदय की निर्मलता में सुशोभित हुआ करती है। उन्होने कहा कि भगवान भक्ति की निर्मलता को ही स्वीकार्य किया करते हैं। कथाव्यास जी ने कहा कि संसार का मंगल भगवान की कृपा के अधीन है। उन्होने कहा कि श्रीराम नाम के जप में जीवन का सार है। उन्होने कहा कि भगवान के नाम का जप ही फलदायी हुआ करता है। स्वामी सम्पूर्णानंद जी ने कहा कि अनीति के मार्ग को कभी भी नहीं अपनाना चाहिए। उन्होने कहा कि अनीति और अत्याचार का अन्त सदैव कष्टप्रद हुआ करता है। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की झांकी पर महिलाओं ने पुष्पवर्षा की। वहीं भजन व मंगलगान से भी माहौल भक्तिमय दिखा। कथा के संयोजक समाजसेवी हरिकेश कुमार मिश्र व सुरेन्द्र मिश्र ने श्रीराम दरबार की भव्य आरती उतारी। सह संयोजक संगम लाल मिश्र व सुशील मिश्र तथा सुनील मिश्र ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। इस मौके पर कालिका प्रसाद पाण्डेय, संतोष पाण्डेय, सुरेन्द्र सिंह, धीरेन्द्र पाण्डेय, सिंटू मिश्र, धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, विपिन पाण्डेय, घनश्याम केसरवानी, अम्बिका पाण्डेय, मुरलीधर तिवारी, अवधेश शुक्ला, रामअभिलाष यादव, लल्लू पाण्डेय, श्याम सुंदर तिवारी, अभिषेक पाण्डेय आदि रहे।