Home आस्था भगवान की कथा को आत्मसात करने से होता है कल्याण-डॉ0 रामकृपाल

भगवान की कथा को आत्मसात करने से होता है कल्याण-डॉ0 रामकृपाल

कथा विश्राम दिवस पर हुआ व्यासपीठ का पूजन अर्चन, बांटा गया प्रसाद
RAEBARELI NEWS: सेमरी झकरासी, नायन में भागवद्कथामर्मज्ञ डॉ० रामकृपाल त्रिपाठी जी की भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र के भावों में भक्तों ने खूब गोते लगाये। कथाव्यास ने परीक्षित-मोक्ष की कथा कहते हुए पुनः भागवत माहात्म्य पर प्रकाश डाला। साथ में परीक्षित के द्वारा अन्त समय में उद्धव के पूछने पर भगवान् ने यह बताया कि आज के बाद श्रीमद्भागवत को ही मेरा रूप समझना। संस्कृत विद्वान डॉ0 शक्तिधर नाथ पाण्डेय ने प्रशस्ति-पत्र का वाचन किया। कथा सुनने आये भक्तों के द्वारा व्यासपूजन के उपरान्त चन्द्रधरनाथ पाण्डेय एवं शिवधरनाथ पाण्डेय ने श्रद्धालुओं को भगवान का प्रसाद वितरण किया। जगद्धरनाथ पाण्डेय एवं कलाधरनाथ पाण्डेय द्वारा भी व्यासपीठ को सम्मानित किया गया। इस मौके पर सुमंत्र, महर्षि, सम्भव, अनुज, वैभव, स्वयंभव, मयोभव, माघ, प्रियम, प्रसून, मलय, मुदित राजेन्द्र शुक्ल, दीपू, ननकू, वीरेन्द्र, बहादुर, स्वामीनाथ, छत्रपाल आदि रहे।