अमावां के लंगड़ा का पुरवा में श्रीमद्भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु
PRATAPGARH NEWS: अमावां के समीप हो रही श्रीमदभागवत कथा में रविवार को वेद एवं धर्म के सार की व्याख्या का वर्णन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। कथाव्यास अयोध्या धाम से पधारे भीष्म पितामह मिश्र जी महराज ने कहा कि धर्म का सार भगवत भजन है। उन्होने कहा कि वेदरूपी कल्प वृक्ष से भगवान के भजन का प्रतिफल जीवन को मंगलमय बना दिया करता है। कथाव्यास ने कहा कि धर्म वही है जिसके तहत जीवन को भगवान के प्रति समर्पित करते हुए नैतिकता के सूत्र में पिरोया जा सके। उन्होने कहा कि भगवान की कथा का रसपान सदैव पीने से जीवन में विकृतियों का विलोप हुआ करता है। भीष्म पितामह जी ने भगवान के चौबीस अवतारों का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि विविध व्यवस्थाओं के लिए भगवान के विविध स्वरूप हुए हैं। उन्होने कहा कि सार यह है कि भगवान एक हैं और उनके विविध स्वरूपों में जगत के उद्धार व कल्याण की लीला है। उन्होने कहा कि श्रीमदभागवत की कथा अथवा श्रीशिवमहापुराण कथा या फिर देवी स्तुति कथा सबका सार यही है कि निर्मल मन से अपने प्रभु के प्रति सदैव समर्पण का भाव रखना चाहिए। उन्होने कहा कि भगवान की कृपा जिस जीव को मिल जाया करती है उसका समस्त लोक मंगलमय व प्रकाशवान हुआ करता है। कथा के संयोजक समाजसेवी राम सुभग मिश्र व अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने व्यासपीठ का विधिविधान से पूजन अर्चन किया। संचालन शिक्षक भरत ओझा ने किया। सह संयोजक पं0 राम अभिलाष मिश्र एवं रजत मिश्र तथा उमेश तिवारी श्रद्धालुओं की सेवा संगत में जुटे दिखे। इस मौके पर संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी महेश, ज्ञानप्रकाश शुक्ल, संतोष पाण्डेय, सिंटू मिश्र, मुरलीधर तिवारी, धीरेन्द्र पाण्डेय, कमलेश मिश्र, प्रदीप मिश्र, महेन्द्र शुक्ल, परमानंद दुबे, रमाकांत तिवारी आदि रहे।







