Home उत्तर प्रदेश बेर में फल मक्खी प्रबंधन से किसान पा सकते हैं अधिक मुनाफा

बेर में फल मक्खी प्रबंधन से किसान पा सकते हैं अधिक मुनाफा

JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसान भाइयों को बेर की खेती और उसमें फल मक्खी के प्रबंधन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बेर शुष्क एवं अर्द्धशुष्क क्षेत्रों की एक महत्त्वपूर्ण फलदार फसल है, इसकी खेती असमतल, पहाड़ी और बिहड़ क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। बेर के वृक्ष मृदा संरक्षण में भी सहायक होते हैं। इसके फलों में विटामिन, आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी हैं। साथ ही, बेर की गुठली से बनने वाली खटाई कई व्यंजनों का स्वाद बढ़ाती है। डॉ. सिंह ने कहा कि 3 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले बेर के पेड़ों पर सितंबर माह में फूल आने लगते हैं, ऐसे में गुणवत्तायुक्त फल प्राप्त करने के लिए फलों का उचित प्रबंधन आवश्यक है। फल मक्खी का प्रकोप फल बनने के समय से ही शुरू हो जाता है। फूल की अवस्था में पौधों पर आकार के अनुसार 1 लीटर पानी में 2-3 मिलीलीटर नीम तेल का छिड़काव करें।फल बनने के 15 दिन बाद नींम के सत् (निबोली) का 5 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें, जिससे फल मक्खी का नुकसान कम होता है।जब फल पूरी तरह विकसित होने लगे तो बेर के फलों की निगरानी अवश्य करें और यदि फल मक्खी का प्रकोप दिखे तो रासायनिक दवाओं का प्रयोग करें। डाईमैथिओट 2 मिलीलीटर/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 1 मिलीलीटर/लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इन उपायों से किसान उच्च गुणवत्ता वाले बेर का उत्पादन कर सकते हैं और बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।