JHANSI NEWS: सिनेमा और संविधान के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित करने वाली डॉ. मनीष कुमार जैसल की नवीन पुस्तक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलगुरु प्रोफेसर मुकेश पांडे को भेंट की गई। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. पांडे के करकमलों से पुस्तक का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस अवसर कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार, कला अधिष्ठाता प्रोफेसर पुनीत बिसारिया, प्रोफेसर सौरभ श्रीवास्तव, डॉक्टर कौशल त्रिपाठी उपस्थित रहे।पुस्तक के उद्घाटन अवसर पर कुलगुरु प्रो. मुकेश पांडे ने कहा कि सिनेमा समाज का सशक्त माध्यम है, जो जनमानस की सोच को प्रभावित करता है। यदि सिनेमा को संवैधानिक मूल्यों के संदर्भ में समझा जाए, तो यह विद्यार्थियों और आम पाठकों के लिए अधिक अर्थपूर्ण हो जाता है। उन्होंने डॉ. जैसल के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पुस्तकें अकादमिक जगत के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होती हैं। डॉ मनीष जैसल ने बताया कि यह पुस्तक हिंदी सिनेमा को संवैधानिक मूल्यों की दृष्टि से देखने और समझने का एक गंभीर और मौलिक प्रयास है। इसमें भारतीय सिनेमा की लगभग 15 प्रमुख फिल्मी हस्तियों के साक्षात्कार शामिल हैं। इन साक्षात्कारों के माध्यम से सिनेमा में लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्त्री-सम्मान और नागरिक अधिकारों जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है। पुस्तक को सिनेमा, मीडिया अध्ययन और सामाजिक विमर्श के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। पुस्तक का विधिवत विमोचन आगामी जमशेदपुर साहित्य समारोह में किया जाना प्रस्तावित है, जहाँ देशभर के लेखक, चिंतक और साहित्यप्रेमी एकत्र होंगे।उल्लेखनीय है कि डॉ. मनीष कुमार जैसल पत्रकारिता विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी तथा जनसंचार विभाग, आईटीएम विश्वविद्यालय, ग्वालियर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत झांसी प्रवास पर थे। इस एमओयू का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त शोध, अकादमिक गतिविधियों और छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान को सशक्त बनाना है।







