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बीएलओ की मौत से हड़कंप, छुट्टी न मिलने का आरोप के बाद 20 घंटे में उठा शव

पत्नी का आरोप – छुट्टी मांगी लेकिन अधिकारियों ने नहीं दी

एसडीएम का दावा – पहले से किडनी बीमारी से जूझ रहे थे मृतक

मुआवजा, नौकरी और बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन ने दिए आश्वासन
FATEHPUR NEWS: बिंदकी तहसील क्षेत्र अंतर्गत गूंझी गांव में बीएलओ (शिक्षा मित्र) की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक की पहचान बृजेन्द्र कुमार पाल के रूप में हुई है, जो शिक्षा मित्र के पद पर कार्यरत थे और बीएलओ की जिम्मेदारी भी निभा रहे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 जनवरी को वह एसआईआर नोटिस फार्म का वितरण कर रहे थे, तभी सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। इस हादसे में उनका दाहिना हाथ फ्रैक्चर हो गया था, साथ ही शरीर के अंदरूनी हिस्सों में भी गंभीर चोटें आई थीं। परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद उन्होंने इलाज के लिए छुट्टी मांगी थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें अवकाश नहीं दिया गया। परिजनों के मुताबिक, चोटिल होने के बावजूद बृजेन्द्र कुमार पाल ड्यूटी करते रहे और उन्होंने एक निजी युवक को बाइक चलाने के लिए रखा था, जबकि वह स्वयं पीछे बैठकर कार्य कर रहे थे। मंगलवार की शाम उनकी हालत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें कानपुर के हैलट अस्पताल ले गए। वहां उपचार के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। मृतक की पत्नी शशि लता देवी ने कल्यानपुर थाना में शिकायती पत्र देकर एसडीएम बिंदकी और खंड शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर छुट्टी मिल जाती और उचित इलाज हो पाता, तो शायद उनके पति की जान बचाई जा सकती थी। वहीं इस मामले में उपजिलाधिकारी बिंदकी ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मृतक पहले से ही किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और उनका इलाज पिछले कई दिनों से चल रहा था। उन्होंने कहा कि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। मंगलवार की शाम करीब 4 बजे जब मृतक का शव गूंझी गांव पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी शशि लता देवी और उनके दो पुत्र—ऋतिक (12 वर्ष) और नवनीत (7 वर्ष)—का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव में शोक का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। घटना के बाद परिजन और ग्रामीण मुआवजे, सरकारी नौकरी और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर अड़ गए और करीब 20 घंटे तक शव को उठने नहीं दिया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने का प्रयास किया। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे प्रशासन द्वारा कई आश्वासन दिए जाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। प्रशासन की ओर से मृतक की पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने, बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, दोनों बच्चों के नाम 10-10 लाख रुपये की फिक्स डिपॉजिट कराने तथा भूमिहीन परिवार को भूमि आवंटित करने का आश्वासन दिया गया। इस मौके पर तहसीलदार अचिलेश सिंह, नायब तहसीलदार रचना यादव, प्रतिमा द्विवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। वहीं समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रामेश्वर दयाल दयालू ने प्रशासन से मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, सरकारी नौकरी और जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है। फिलहाल, इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।