JHANSI NEWS: रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के मत्स्य वैज्ञानिकों ने बरसात के मौसम में मछली पालकों के लिए वैज्ञानिक सलाह दी है। डॉ. नीलेश कुमार और डॉ. प्रमोद कुमार पाण्डेय ने बताया कि मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसमें बरसात के मौसम में विशेष ध्यान रखने की जरुरत है। क मानसून के समय मछली पालक तालाबों के बांधों की अच्छी तरह से मरम्मत कर उन्हें मजबूत बनाए। तालाब में अतिरिक्त पानी के सुरक्षित निकास के लिए एक सुव्यवस्थित ओवरफ्लो चौनल/ निकास द्वार का निर्माण अवश्य करें। पानी निकास द्वार पर जाली लगाना आवश्यक है ताकि मछलियाँ बाहर न निकलें। मत्स्य पालक खरपतवारों को लगातार तालाब से हटाते रहें। तालाब में अत्यधिक जलीय खरपतवार मछलियों के लिए ऑक्सीजन प्रतियोगिता का कारण बनते हैं और जाल डालने में बाधा उत्पन्न करते हैं। बरसात के मौसम में तालाब में ऑक्सीजन की कमी से मछलियां ऊपर आ जाती हैं, सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और अंततः मर सकती हैं। जिसका कारण है लगातार बरसात के बादल छाए और सूर्य के प्रकाश की कमी जिससे फाइटोप्लैंकटन द्वारा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वर्षा का पानी कार्बनिक पदार्थों को बहाकर ला सकता है, जिसके अपघटन से भी ऑक्सीजन की खपत होती है। ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए यांत्रिक वातन (एरेटर) का उपयोग करें या पानी में चूना और या पोटेशियम परमैंगनेट डालें। बारिश का पानी आमतौर पर अम्लीय होता है, जो तालाब के पानी के पी.एच. को कम कर देता है। जिससे पी.एच. में अचानक गिरावट से मछलियां तनावग्रस्त हो जाती हैं और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती हैं। पी.एच. को बनाए रखने के लिए चूने (कैल्शियम कार्बाेनेट) का उपयोग करें। अत्यधिक कार्बनिक भार और कम ऑक्सीजन स्तर के कारण अमोनिया और नाइट्राइट जैसे विषाक्त पदार्थ बढ़ सकते हैं।
किसान किसी भी असामान्य व्यवहार, जैसे सतह पर तैरना, सुस्ती, शरीर पर घाव या फटे हुए पंख आदि के लक्षण दिखाई देने पर नियमित रूप से तालाब को साफ रखें और मृत मछलियों को तुरंत हटा दें। यदि किसी बीमारी का प्रकोप होता है, तो तुरंत वैज्ञानिक सलाह लें और उचित रासायनिक उपचार करें। पोटेशियम परमैंगनेट, चूना या अन्य अनुमोदित दवाओं का उपयोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। बाहरी स्त्रोतों से मछलियों के प्रवेश को सीमित करें और उपकरण साझा करने से बचें, क्योंकि इससे बीमारियों का प्रसार हो सकता है। यदि आपके क्षेत्र में बाढ़ का खतरा है, तो तालाब के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाने पर विचार करें। महत्वपूर्ण उपकरण जैसे एरेटर, पानी की गुणवत्ता परीक्षण किट और प्राथमिक उपचार दवाओं जैसे आवश्यक उपकरणों का बैकअप तैयार रखें। स्थानीय मछली पालन विभाग या विशेषज्ञ से संपर्क जानकारी अपने पास रखें ताकि आपात स्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त की जा सके।







