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बड़े पीर साहब (इराक) की बारगाह से वापस आने पर हमनवाओं ने फूल मालाओं ओर शॉल उड़ाकर किया सम्मान

पीर ज़ादे चमन ए मुईनुद्दीन क़ादरी ने हज़रत शेख अब्दुल कादिर जिलानी (गौसे_ए आज़म) के जीवन परिचय पर डाला प्रकाश, ओर मांगी दुआ

ETAWA NEWS: रामगंज चौराहे के पास बड़ी दरगाह के सामने स्थित आवास पर पीर जादे चमन ए मुईनुद्दीन क़ादरी एवं उनके वालिद बड़े पीर साहब हज़रत शेख अब्दुल कादिर जिलानी (गौसे ए आज़म) बगदाद (इराक ) से वापस आने पर उनके हमनवाओं ने फूल मालाओं ओर शॉल उड़ाकर सम्मानित किया. इस अवसर पर हज़रत चमन कादरी ने बड़े पीर साहब के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गौसे ए पाक, जिन्हें गौस-ए-आज़म और बड़े पीर के नाम से भी जाना जाता है,वह एक महान सूफी संत थे, जिनका पूरा नाम सैय्यद अब्दुल कादिर जिलानी था। उन्होंने कादिरिया सूफी सिलसिले की स्थापना की और इस्लामी जगत में बहुत आदर और सम्मान के साथ उन्हें याद किया जाता हैं। उनका पूरा नाम सैय्यद अब्दुल कादिर जिलानी था, उनका जन्म 1 रमज़ान 470 हिजरी (लगभग 1077 ईस्वी) को ईरान के जिलान कस्बे में हुआ था। वे पैगंबर मुहम्मद के वंशज थे पिता की ओर से हसनी सैय्यद और माता की ओर से हुसैनी सैय्यद थे। उनका निधन 11 रबी-उल-सानी 561 हिजरी (लगभग 1166 ईस्वी) में बगदाद में उनका इंतकाल हुआ। उनका उर्स (पुण्यतिथि) हर साल 11 रबी-उल-सानी को मनाया जाता है, जिसे ’11वीं शरीफ’ भी कहते हैं। उनका मकबरा इराक के बगदाद में है। उनके बारे में कहा जाता है कि वे कई सालों तक ईशा की वुजू से फज़िर की नमाज़ पढ़ते थे ओर हर रात पूरा कुरान खत्म कर देते थे. इस अवसर पर मौजूद रहे इंसानी भाईचारा समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आमीन भाई, अंसारी समाज के अध्यक्ष अतिकुर रहमान, पहलवान टायर वाले, इमरान खान, आदि उनके चाहने वालों ने फूल मालाओ एवं शॉल उड़ाकर किया सम्मानित.पीर ज़ादे चमन ए मुईनुद्दीन कादरी ने सबके लिए दुआ की..