PRAYAGRAJ NEWS: प्रधान महालेखाकार (लेखापरीक्षादृप्), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज के कार्यालय में आयोजित “डेटा-आधारित लेखा परीक्षा पर क्षेत्रीय कार्यशाला” के चैथे दिन भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (ब्।ळ) की उस पहल का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (।प्) एवं मशीन लर्निंग (डस्) जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग सरकारी लेखापरीक्षा में किये जाने के सम्बन्ध में आज दिनांक 12 फरवरी 2026 महानिदेशक श्री प्रवीन्द्र यादव द्वारा डेटा-आधारित ऑडिट दृष्टिकोण की ओर संक्रमण पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति के साथ हुआ। उनके द्वारा इस बात पर विशेष बल दिया गया कि पारंपरिक मैनुअल सैंपलिंग से पूर्ण डेटा-विश्लेषण की ओर बढ़ना आधुनिक लेखा-परीक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वचालित डेटा निष्कर्षण के माध्यम से विभाग अधिक वित्तीय पारदर्शिता प्राप्त कर सकता है तथा जोखिमों की अधिक प्रभावी पहचान संभव हो सकेगी। इसके पश्चात विभाग द्वारा विकसित एआई आधारित चैट-जीपीटी जैसे ओसीआर उपकरण (वबत.तबइाप-रंपचनत.पद) का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया, जिसका उद्देश्य असंरचित दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करना है। यह भी बताया गया कि इन उपकरणों का उपयोग केवल डेटा निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कैन की गई पीडीएफ फाइलों को संरचित एवं विश्लेषण योग्य जानकारी में परिवर्तित करने के लिए किया जा सकता है। बैठक में विभिन्न कार्यालय स्तरों पर उपलब्ध आईएफएमएसध्डेटा डंपध्ई-वाउचर की उपलब्धता एवं अभिगम्यता पर भी चर्चा की गई। बड़े पैमाने पर संरचित पीडीएफ दस्तावेजों के विभिन्न उपयोग-प्रकरणों का प्रदर्शन किया गया। यह विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि उपयोगकर्ता-अनुकूल, नो-कोड ओसीआर उपकरणों को अपनाया जाए, ताकि बिना प्रोग्रामिंग ज्ञान वाले लेखा परीक्षक भी जटिल दस्तावेजों का विश्लेषण एवं डेटा निष्कर्षण स्वतंत्र रूप से कर सकें। कार्यशाला के अंत में मानक सत्यापन तथा नियम-आधारित जांच के क्रियान्वयन का प्रदर्शन किया गया, जिससे संदिग्ध लेन-देन की पहचान अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से की जा सके।







