छोटे राज्यों के गठन के लिए बाबा साहब भी थें प्रबल समर्थक
FATEHPUR NEWS:बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ‘बुंदेलखंडी’ ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विज़न 2047 उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन के बिना अधूरा रह जाएगा। जब तक उत्तर प्रदेश नहीं बंटेगा, तब तक प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र का संतुलित विकास संभव नहीं है। प्रवीण पाण्डेय ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिसकी आबादी 25 करोड़ से अधिक है और भौगोलिक आकार कई देशों से बड़ा है। इतने विशाल प्रदेश को एक राजधानी और एक प्रशासनिक ढाँचे से प्रभावी ढंग से चलाना कठिन है। यही वजह है कि प्रदेश के कई हिस्से उपेक्षा का शिकार हैं और वहाँ विकास केवल चुनावी वादों तक सीमित रह गया है। उन्होंने छोटे राज्यों के उदाहरण गिनाते हुए कहा कि उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ के गठन के बाद वहाँ प्रशासनिक दक्षता बढ़ी, उद्योग और संसाधनों का बेहतर उपयोग हुआ तथा युवाओं को नए अवसर मिले हैं। ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश को भी पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध और हरित प्रदेश में बाँटकर ही न्यायपूर्ण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री पाण्डेय ने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर छोटे राज्यों के प्रबल समर्थक रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन नए राज्य बनाकर देश को नई दिशा दी। मायावती सरकार ने भी विधानसभा से बुंदेलखंड राज्य का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से यह पहल अधूरी रह गई। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से राजनीति केवल मुख्यमंत्री की कुर्सी तक सीमित रह गई और जनता की आकांक्षाएँ पीछे छूट गई हैं। अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न 2047 को सफल बनाने के लिए साहसिक कदम उठाकर उत्तर प्रदेश का पुनर्गठन किया जाए।







