इस्लाम ढाई दशक से रामलीला में व्यास की निभा रहे है भूमिका
MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय) जनपद के पहाड़ी विकास खण्ड के धर्मदेवा गांव में एक शख्स निवास करते हैं मोहम्मद इस्लाम।” एकता, आपसी सौहाद्र व आपसी भाई चारा के प्रतीक हैं मोहम्मद इस्लाम। इन्हें कट्टरपंथी मुसलमान दबी जुबान गालियां देते हैं तो वहीं हिन्दू इनके लिये अपने पलक पावड़े बिछाए उन्हें माला पहनाने के लिये उनकी राह ताकते हैं। गंगा-जमुनी संस्कृति मिसाल पेश करने वाले मुः इस्लाम भगवान राम के रंग में रंग गये हैं। राम हो या रहीम अल्लाह हो या भगवान सभी को एक मानने वाले इस्लाम ढाई दशक से रामलीला में व्यास की भूमिका निभा रहे हैं। वह रामचरित मानस और रामायण की चौपाई भी गाते हैं और अपने धर्म का फातिहा भी पढ़ते हैं। अपने धर्म के अनुसार, पांचों समय का नमाज भी वे नही भूलते। इस्लाम को कण-कण में ईश्वर का स्वरुप नजर आता है। उन्हें न तो धर्म का बंधन है और न तो जाति का। ईश्वर भी नहीं चाहता कि इंसानी कौम का बंटवारा हो। इसलिये वह समय-समय पर ऐसे नुमाइंदो को भेजता रहता है जो आपसी भाईचारा व सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं। इस्लाम कहते हैं कि ईश्वर एक है, वह राम हो या रहीम। इंसानियत से बड़ा कोई रिश्ता नहीं है। राम के धुन में वे ऐसा डूब गये कि उन्होंने तीन बार नौकरी दोड़ दी। इस्लाम ने रामचरित मानस की एक पार्टी भी बना रखी है, वह प्रयागराज में जब संगम लगता है तो वहां रामचरित मानस गाने जाते हैं। उन्हें हर धर्म में ईश्वर एक दिखता है। उनका मानना है कि अगर धर्म अलग-अलग होता तो हर धर्म के मालिक अलग-अलग होते तो हर जाति धर्म के लोगों के खून, हर धर्म का हवा-पानी, सूर्य-चन्द्रमा सब अलग-अलग होते। सबके रूप-रंग अलग होते। इस्लाम के स्वर में साक्षात सरस्वती का वास है। वे गजल, कौव्वाली, कजरी, होली गीत, भजन सब गाते हैं। आकाशवाणी व दूरदर्शन सहित देश के कोने कोने में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। और तालियों की गड़गड़ाहट से लेकर तमाम पुरस्कार, प्रशस्तिपत्र व सम्मान इनकी झोली में भरे पड़े हैं। इनके मानस पाठ से सद्भाव के रंग चटक हो जाते हैं। इस्लाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुरीद हैं और उनसे मिलने की इच्छा रखते हैं।







