KAUSHAMBI NEWS: नगर पंचायत अजुहा के नेता नगर मोहल्ले के टांडा रोड पर कथा के सातवें दिन धनुष यज्ञ के साथ परशुराम लक्ष्मण संवाद की लीला देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए ,सीता स्वयंवर में आने को देश के अनेकों राजा व राजकुमार ने भाग लिया लेकिन कोई भी शुभ धनुष को हिला तक नहीं सका इससे निराश राजा जनक की बातें सुनकर लक्ष्मण ने कहा कि जिस सभा में रघुवंशी हो वहां इस प्रकार की बात करना शोभा नहीं देता इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम ने धनुष को तोड़ दिया धनुष टूटते ही परशुराम महाराज जनक की सभा में जा पहुंचे हैं भगवान शंकर जी के टूटे हुए धनुष को देख अत्यंत क्रोधित होकर राजा जनक से पूछते हैं कि मेरे आराध्या धनुष को किसने तोड़ा इसके बाद परशुराम लक्ष्मण के साथ तीखा संवाद होता है। बहु धनुही तोरि लरकाईं, कबहुं न असरिष कीन्ह गोसाईं अंत में परशुराम जी को ज्ञात होता है की धनुष को तोड़ने वाला और कोई नहीं बल्कि स्वयं त्रिलोकी नाथ गोसाई भगवान विष्णु के अवतार श्री राम है।







