BHADOHI NEWS: पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने मंगलवार को इंडिया कार्पेट एक्सपो-2025 के अंतिम दिन भ्रमण करने के लिए कार्पेट एक्सपो मार्ट पहुंचे। उन्होंने निर्यातक के स्टालों पर पहुंचकर वहां पर प्रदर्शित किए गए विभिन्न प्रकार के कालीनों के उत्पादों का अवलोकन किया और व्यापारियों के साथ संवाद किए। पूर्व सांसद पत्रकारों से भी रुबरु हुए। पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि कालीन भारत का सबसे बड़ा ग्रामीण कृषि उद्योग है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। कार्पेट जूट और ऊन से बनता है। कपास से जूट और भेड से ऊन बनाने का काम कृषक करते हैं। उन्होंने कहा कि कालीन ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा हुआ उद्योग है। जो ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को सुधारता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था व कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की जवाबदेही सरकार की है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) अध्यक्ष कुलदीप राज वाटल, परिषद के प्रशासनिक समिति के सदस्य रवि पाटोदिया, पीयूष बरनवाल व मेहराज यासिन जान व परिषद की कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक डॉ.स्मिता नागरकोटी ने भारतीय हस्तनिर्मित कालीन पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से अवगत कराया। बताया कि इसके कारण कालीन उद्योग संकट में है। इसमें लगे लाखों बुनकरों व श्रमिकों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कालीन उद्योग को अगले 6 माह के लिए 20 फीसदी प्रोत्साहन राशि सरकार से दिलाने की मांग रखी। जिस पर पूर्व सांसद ने कहा कि आप सभी को भरोसा दिलाते हैं कि सरकार के समझ इस मांग को रखा जाएगा और प्रोत्साहन राशि दिलाने का प्रयास करेंगे।
कालीन उद्योग को मिले बेलआउट पैकेज तो ले उद्योग गति
इंडिया कार्पेट एक्सपो में छाया रहा अमेरिका टैरिफ का मुद्दा
इंडिया कार्पेट एक्सपो-2025 का मंगलवार को समापन हो गया। पूरे फेयर तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय कालीन उद्योग पर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ का मुद्दा छाया रहा। क्योंकि अमेरिका भारतीय कालीनों का सबसे बड़ा खरीदार है। फेयर से निर्यातकों की अलग-अलग प्रतिक्रिया मिली। सरकार द्वारा कालीन उद्योग को बेलआउट पैकेज दिए जाने की भी मांग उठीं।
सरकार करें उद्योग की वित्तीय सहायताःरुपेश बरनवाल
निर्यातक रुपेश बरनवाल ने बताया कि इस बार कालीन मेले में प्रतिभाग नहीं किए। उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ का असर है। टैरिफ के कारण अमेरिका में भारतीय कालीन उत्पाद महंगे हो गए हैं। सरकार जब-तक उद्योग का सहयोग नहीं करेगी। तब-तब निर्यात गति नहीं पकड़ेगा।
ठीक-ठाक है रहा इंडिया कार्पेट एक्सपोःपरवेज अंसारी
निर्यातक परवेज अंसारी की मानें तो भदोही में आयोजित इंडिया कार्पेट एक्सपो ठीक-ठाक ही रहा। भले ही अमेरिकी ग्राहकों की संख्या कम रही हो। लेकिन दुनियाभर से पहुंचे खरीदारों ने नए-नए उत्पादों को देखा और उसके बारे में पूछताछ की। यहीं पूछताछ व्यापार में तब्दील होते हैं।
स्टाल पर पहुंचकर ग्राहकों ने की पूछताछःशादाब हुसैन
निर्यातक शादाब हुसैन अंसारी गोल्डी ने कहा कि फेयर को खराब नहीं कहा जा सकता है फिलहाल सफल ही रहा। अमेरिकी खरीदार कम आए लेकिन अन्य देशों से आए ग्राहकों ने स्टाल पर पहुंचकर व्यापारिक पूछताछ की। वह व्यापार में कितना परिवर्तित होगा। यह कहना अभी मुश्किल है।
सरकार बेलआउट पैकेज देने की करें घोषणाःफिरोज सिद्दीकी
निर्यातक फिरोज अख्तर सिद्दीकी का कहना रहा कि मौजूदा समय में अमेरिका का कोई अन्य देश विकल्प नहीं हो सकता है। उद्यमियों को नए बाजार तलाशने और खपत को बढ़ाने के लिए थोड़ा समय चाहिए। लेकिन तब तक बुनकरों के पलायन को रोकने के लिए सरकार बेलआउट पैकेज दिए जाने की घोषणा करें।







