LUCKNOW/BARABANKI NEWS: प्रदेश का मशहूर देवा कार्तिक मेला इस बार 8 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। यह मेला सूफी संत हज़रत हाजी वारिस अली शाह के पिता सैय्यद कुर्बान अली शाह की याद में हर साल कार्तिक माह में लगता है।देवा शरीफ की दरगाह पर लगने वाला यह मेला हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। जहां जो दोनों समुदायों के बीच सौहार्द और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है।यहां हर साल लाखों की तादाद में दूर-दराज़ से श्रद्धालु और अकीदतमंद पहुंचते हैं।मेले के दौरान दरगाह परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसमें मिलाद शरीफ और कव्वाली की महफ़िलें खास आकर्षण रहती हैं। लंगर में आने वाले सभी मेहमानों को बड़े पैमाने पर खाना खिलाया जाता है। रास्तों में “या वारिस हक वारिस” की सदाएं गूंजती रहती है। मेले में एक विशाल पशु बाजार भी लगता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पशुओं की बिक्री होती है।शान-ए-मीरजापुर अहलेसुन्नत अलजमात सूफी मौलाना अबरार हुसैन वारसी ने बातचीत के दौरान एक इंटरव्यू में बताया कि सैय्यद कुर्बान अली शाह साहब, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की 25वीं पीढ़ी से थे। उनके पुत्र हज़रत सैय्यद हाजी वारिस अली शाह को आज भी लोग मोहब्बत, अमन और भाईचारे की मिसाल मानते हैं। उनका मशहूर कथन “जो रब है, वहीं राम है” आज भी समाज को जोड़ने का पैगाम देता है।“देवा मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता की जीती-जागती मिसाल है। यही वारिस पाक की असली तालीम है।







