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दहेज के लोभियों का हुआ अंत, बदनसीब बहू की दास्तां देख भावुक हुए श्रोता

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लालगोपालगंज। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर आयोजित तीन दिवसीय रामनवमी मेले का समापन सामाजिक चेतना के साथ हुआ। सरगम संगीत पार्टी आनापुर के लोक कलाकारों ने नौटंकी के माध्यम से दहेज प्रथा के विरुद्ध दहेज की आग में जल गई बदनसीब बहू, नाटक का मर्मस्पर्शी सजीव चित्रण किया।
कहानी रसूखदार बाबू बादल सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने अपने भाई रमेश का विवाह निर्धन अनाथ कन्या सपना से कराया। कम दहेज के कारण शराब के आदी बादल सिंह और रमेश ने सपना को जिंदा जला दिया। विरोध करने पर सपना के भाई सावन को पुलिस व रसूखदारों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह मानसिक संतुलन खो बैठा। कहानी में मोड़ तब आया जब बादल सिंह की बहन राधा सावन पर मोहित हो गई। तांत्रिक की मदद से उसका उपचार कराया। सावन ने पागल होने का ढोंग जारी रखते हुए राधा से विवाह किया। अंततः अपनी बहन के हत्यारों को गोलियों से भूनकर प्रतिशोध पूरा किया।

– कलाकारों की अदाकारी ने दर्शकों को बांधे रखा।
लालगोपालगंज। नौटंकी में सपना की भूमिका में वसीम डांसर, सावन के सशक्त किरदार में सानू डांसर ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। राधा के रूप में अनुज डांसर, क्रूर जेठ के रूप में नसीम डांसर एवं भाई रमेश के पात्र में राकेश डांसर ने अपनी अदाकारी से नौटंकी जान फूंक दी। सेठ करोड़ीमल के रूप में रामकैलाश विश्वकर्मा तथा हास्य कलाकार नन्हें लाल ने खूब मनोरंजन किया। ढोलक-नगाड़े पर नन्कऊ एवं हारमोनियम पर सिपाहीलाल की जुगलबंदी रही। नौटंकी का संचालन फूलचन्द्र ने किया, जबकि निर्देशन फुन्नेलाल द्वारा किया गया।

– कला बनी समाज का दर्पण।
लालगोपालगंज। रामनवमी मेले में आयोजित नौटंकी का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में पैठ बना चुकी दहेज जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना था। लोक कलाकारों ने यह दिखाया कि अन्याय का अंत सदैव बुरा होता है। कानून व नियति से कोई अपराधी बच नहीं सकता। दर्शकों ने कलाकारों के इस सार्थक प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना कर उन्हें पुरस्कृत भी किया।