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डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक महान शिक्षाविद, वकील, के साथ महान लेखक थे:पूर्व ब्लॉक प्रमुख

PRAYAGRAJ NEWS: एकात्म मानवतावाद के प्रतीक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत आज भी रहस्यमय ही है। उनकी मौत का पर्दाफाश न हो पाना दुखद है। उक्त विचार भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर मांडा मंडल द्वारा रविवार को मांडा ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष यमुनापार राजेश शुक्ला ने व्यक्त किया। कहा कि जब 1953 में डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी बिना परमिशन काश्मीर जाने लगे, तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको काफी रोका, लेकिन वे नहीं माने और काश्मीर चले गए। कश्मीर पहुंचते ही वे गिरफ्तार कर लिए गए और जेल में ही उनकी रहस्यमय दशा में मौत हो गई। उनकी मौत से आज तक परदा नहीं हट पाना काफी दुखद है। बताया कि आज उनके जन्मदिन पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण होना था, लेकिन किंही कारणों से अब यह पौधारोपण मंडल व तहसील, जिले के सभी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों द्वारा तीन दिन बाद किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही मांडा मंडल अध्यक्ष लीलावती गुप्ता ने जिला अध्यक्ष राजेश शुक्ल को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। तथा संचालन राम बली मौर्या ने किया। वहीं पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अशोक सिंह ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जयंती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक महान शिक्षाविद, वकील, लेखक, प्रभावशाली वक्ता एवं प्रखर राष्ट्रवादी थे। उनका जन्म छह जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ। 23 जून 1953 को उन्होंने देश की एकता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान कर दिया। कार्यक्रम में पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष सुधाकर द्विवेदी, पूर्व जिला महामंत्री मांडवी शरण द्विवेदी, अमरेश मिश्रा पप्पू, कृष्ण दास नाथू गुप्ता, भगवान दास कुशवाहा पूर्व चेयरमैन सिरसा मंडी समिति, राम सुख कुशवाहा, शिव प्रसाद सोनी, संगम लाल विश्वकर्मा, रामराज मौर्या तमाम लोग मौजूद रहे।