FATEHPUR NEWS: जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर बीते दिनों कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने फटकार लगाई थी, लेकिन इसका कोई असर अस्पताल कर्मचारियों पर होता नजर नहीं आ रहा है। ताजा मामला शुक्रवार को मुचुवापुर निवासी कुलदीप कुमार पुत्र मोतीलाल का है, जिनका भदवा गांव के पास एक्सीडेंट हो गया था। घायल को इलाज के लिए जिला अस्पताल ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहां इलाज के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर सागर ने उन पर दबाव बनाकर 800 रुपये का इंजेक्शन लगवाया। यही नहीं, उसने इंजेक्शन लाने के लिए एक निजी मेडिकल स्टोर का नाम भी बताया। इस मामले में मरीज के जीजा जय सिंह ने बताया कि मेरे मरीज का एक्सीडेंट हुआ था, हम उसे जिला अस्पताल लेकर आए। वहां सागर नाम के स्टाफ ने कहा कि 800 रुपये का इंजेक्शन तुरंत मंगवाओ, इससे इनकी चोट ठीक हो जाएगी। हम लोग घबराए हुए थे और कुछ समझ नहीं आ रहा था, इसलिए जैसा उसने बोला, हमने वैसा ही किया। अस्पताल सूत्रों द्वारा बताया गया है कि जिस इंजेक्शन को मरीज से 800 रुपये में दिलवाया गया, उसकी वास्तविक लागत मेडिकल स्टोर पर 80 से 150 रुपये के बीच होती है। इनका कोई नाम नहीं होता है। बस पर्ची पर काम होता है। महंगे दाम पर बिकवाने के बाद खेल यहीं खत्म नहीं होता, बल्कि मेडिकल स्टाफ उस इंजेक्शन की डिब्बी का ऊपरी कैप लेकर दोबारा मेडिकल स्टोर पहुंचता है और वहां से 50 प्रतिशत कमीशन ले लेता है।







