Home उत्तर प्रदेश जिलाधिकारी ने डेंगू से बचाव हेतु बनाई कार्ययोजना

जिलाधिकारी ने डेंगू से बचाव हेतु बनाई कार्ययोजना

विगत वर्षो में आये हुए डेंगू धनात्मक केसों के अनुसार जनपद में 128 हॉट-स्पॉट स्थान किये गये चिन्हित

SAHARANPUR NEWS: जिलाधिकारी  मनीष बंसल के निर्देशानुसार वर्तमान संक्रमण काल व अत्यधिक वर्षा को दृष्टिगत रखते हुए जनपद में संक्रामक एवं वेक्टर जनित रोगो को नियंत्रित रखने हेतु अंतर्विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए निरंतर कार्यवाही की जा रही है। उन्होने संबंधित अधिकारियों को दिन-प्रतिदिन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। विगत वर्षो में आये हुए डेंगू धनात्मक केसों के अनुसार जनपद में 128 हॉट-स्पॉट स्थान चिन्हित किये गये है तथा कार्ययोजना बना कर फॉगिंग व एन्टी-लार्वा का छिडकाव नियमित रूप से किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू एवं चिकनगुनिया मच्छर (एडीज) के प्रजन्न स्थानों को समाप्त करने हेतु अति संवेदनशील क्षेत्रों में टीम गठित कर व्यापक सोर्स रिडक्शन एक्टिविटी कराई जा रही है।जनपद से आर0आर0टी0 टीमों के द्वारा गांव-गांव भ्रमण किया जा रहा है जैसे ग्राम धौराला व कपूरी ब्लॉक नकुड, ग्राम पिलखनी, बीदपुर, सरूरपुर गाडा ब्लॉक सरसावा, ग्राम बाबरी ब्लॉक सुनहेटी, मोहल्ला काईस्तान ब्लॉक रामपुर मनिहारन, तथा नगर क्षेत्रो में षास्त्री नगर, पंत विहार ,हकीकत नगर, अमन विहार, शिव विहार, खाताखेडी, कमेला कॉलोनी आदि में भ्रमण कर सोर्स-रिडक्शन कार्यवाही कराई गई है। सोर्स रिडक्शन एक्टिविटी के दौरान सम्पूर्ण क्षेत्र में (एडिज) मच्छर जनक परिस्थितियों एवं लार्वल हैबिटेड को समाप्त करते हुये लार्वल प्रजनन पर नियंत्रण हेतु विशेष कार्यवाही करना तथा डेंगू लार्वा पाये जाने वाले आवासों के स्वामियों को नोटिस दिया जा रहा है। नगर निगम के द्वारा नगर क्षेत्र के कमेला कॉलोनी में मच्छर जनित परिस्थिति न समाप्त करने पर 4 लोगो को 100-100 रू0 का अर्थदण्ड भी लगाया जा चुका है। जनपद में डेंगू रोगियों हेेतु समस्त आवश्यक सुविधाआंे सहित जिला चिकित्सालय में 20 बेड का एक वार्ड तथा समस्त सी0एच0सी0 एवं पी0एच0सी0 पर 5 बेड का एक-एक वार्ड आरक्षित किया गया है। डेंगू के सम्भावित केस की सूचना मिलने पर क्षेत्र अथवा ग्राम में सोर्स रिडक्शन एक्टिव केस सर्च, फॉगिंग, एन्टीलार्वा एवं क्या करें क्या ना करें के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। पुष्ट रोगी मिलने पर उपरोक्त कार्यवाही के साथ-साथ 24-48 घण्टों के भीतर रोगी के निवास स्थान के आस-पास के 50 घरों में इंडोर स्पेस स्प्रे कराया जा रहा है। जनपद में नियमित रूप से मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया ,टाइफाइड आदि संक्रामक रोगो की निरंतर जांच कराई जा रही है तथा अब तक 2020 जांचे की जा चुकी है। नगर व ग्रामीण क्षेत्र के कुछ चिन्हित स्थानों पर गम्बूसिया मछली (लार्वा भक्षी) भी डाली गयी है।  मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण कुमार द्वारा सभी आशाओं व समस्त स्टाफ को संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया आदि को दृष्टिगत रखते हुए निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिदिन घर-घर जाकर पानी से भरे बर्तन जैसे कूलर, गमले, छतों पर रखे पुराने टायर, फ्रीज की टेª आदि जिनमें एक सप्ताह से ज्यादा पानी रूका रहता है उन्हें खाली कराएं क्योंकि इन्ही बर्तनों में एडिज लार्वा प्रजनन करता है। जनपद में विगत तीन वर्षों से कोई मलेरिया केस रिपोर्ट नहीं हुआ है। जनपद में आखिरी बार सितम्बर 2021 में मलेरिया रोगी पाया गया था। इस वर्ष जनपद को मलेरिया मुक्त घोषित कर सकता है। जनपद सहारनपुर प्रदेश में प्रथम जनपद होगा जो मलेरिया मुक्त कहलायेगा। जनपद में मलेरिया जांच आर0डी0टी0 एवं रक्त पटिट्का द्वारा नियमित रूप से की जा रही है। माह अप्रैल 2025 एवं माह जुलाई 2025 में संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान आशा द्वारा डोर टू डोर सर्वे कर मच्छर जनक परिस्थितियां नष्ट कराई गयी। आई0ई0सी0 एवं बी0सी0सी0 के माध्यम से सप्ताह में एक बार हर रविवार मच्छर पर वार के अन्तर्गत एडिज मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। मलेरिया/डेंगू के लक्षण होने पर क्या करेंः-  तेज बुखार होने पर पैरासीटामोल की गोली ले सकते है। ठण्डे पानी से शरीर को पोछें। डेंगू उपचार के लिये कोई खास दवा अथवा बचाव के लिये कोई वैक्सीन नही है। औषधियों का सेवन चिकित्सकों की सलाह से करें।  गंभीर मामलों के लक्षण जैसे (खून आना) होने पर चिकित्सालय में तुरन्त सम्पर्क करें। एसप्रीन व स्टीराइड दवाईयों का सेवन कदापि नही करें। डेंगू रोगी को मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करायें। ध्यान रखेंः- डेंगू रोग को फैलाने वाला मच्छर शहरी, अर्ध शहरी आबादी वाले मकानों में पाया जाता है, गन्दी नालियों में यह मच्छर नही रहता है, यह मच्छर घरों में साफ इक्ठठा पानी में अपने अण्डे देता है। घरों के अन्दर ये पानी कूलर, छत पर खुली टंकियॉ, टीन के खाली डिब्बे, पुराने टायर, गमले, खाली बोतलें, सिस्टर्न, मनी प्लान्ट के गमले आदि में जंहा पर पानी अस्थाई रूप से एकत्रित रहता है वही पर प्रजनन कर अपनी संख्या बढाता है। घरों के अन्दर इन जगहों पर पानी इक्ठठा न रहने दें।