Home आस्था गाय और विज्ञान से जुड़ें,आयुर्वेदिक दृष्टि में गाय का महत्त्व

गाय और विज्ञान से जुड़ें,आयुर्वेदिक दृष्टि में गाय का महत्त्व

गाय की पूजा करने से मिलता है तैंतीस कोटि देवताओं के पूजन का फल

SAHARANPUR NEWS: सनातन धर्म में गाय का विशेष महत्व है। इसी के चलते इसे गौमाता का दर्जा दिया जाता है । ऐसा माना जाता है कि जिस घर में गाय रहती है , उस घर में से सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं । गाय का दूध प्राणों की रक्षा करता है ‌। दूध पीकर मनुष्य जीवित रह लेता है । जिन बच्चों को मां स्तनपान नहीं करा पाती थी , उन बच्चों को भी गाय का दूध दिया जाता था ताकि वे जीवित रह सके और उनके शरीर का पोषण हो सके । इसलिये गाय का दूध आज भी नवजात बच्चों को पिलाया जाता है और गाय को माता का दर्जा दिया जाता है । वेदों में गाय को पूजनीया बताया गया है , क्योंकि इसमें तैंतीस कोटि यानी तैंतीस प्रकार के देवताओं का वास होता है । इन तैंतीस प्रकार के देवताओं में बारह आदित्य आठ वसु ग्यारह रुद्र , इन्द्र और प्रजापति है । इसलिए गाय की सेवा करने से तैंतीस कोटि देवताओं का पूजन संपन्न हो जाता है। गव्यं पवित्रं रसायनं पथ्यं हृदयं वलं बुद्धिं करं। आयु‌‌प्रदं रक्तविकारहारि त्रिदोषं  हृदोगविषापहं स्यात ।।
भारतीय गाय से प्राप्त होने वाले गव्य पवित्र है , रसायन है , और हृदय के लिए औषधि हैं , बुद्धि को बढ़ाते हैं , लंबी आयु देते हैं , रक्त के विकारों को दूर करते हैं , तीनों दोषों को संतुलित रखते हैं , वे सभी रोगों का उपचार एवं शरीर को  दोष रहित करते हैं। गौ माता की पूजा करने की विधि सभी जगह भिन्न-भिन्न है और इसके बारे में कहीं भी आसानी से जाना जा सकता है । लक्ष्मी, धन-वैभव आदि की प्राप्ति के लिये गाय के शरीर के उस भाग की पूजा की जाती है , जहां से गोबर एवं गोमूत्र प्राप्त होता है । क्योंकि वेदों में कहा गया है कि गौ में बसे लक्ष्मी अर्थात गोबर में लक्ष्मी का वास है और गोमूत्र में धनवंतरी अर्थात गोमूत्र में भगवान धन्वंतरि का वास होता है। वैज्ञानिक समुदाय ने चिकित्सा में गोमूत्र की उपयोगिता को फिर से मानना शुरू कर दिया है ‌। पश्चिमी  देशों में किये गये अनुसंधान से पता चला है कि गोमूत्र एंटीबायोटिक , रोगाणुरोधी फंगसरोधी और तपेदिकविरोधी है । गोमूत्र-अर्क गतिविधि बढ़ाने वाला और संक्रमण-विरोधी तथा कैंसर विरोधी होने के साथ-साथ एंटीबायोटिक अणुओं की उपलब्धता को सुविधाजनक बनाने वाला सिद्ध हो चुका है। गाय के घी से मनुष्य के शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकरणों का दुष्ट प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता है । अग्नि में गाय के घी की आहुति देने से जो धुआं जहां तक फैलता है , वहां तक का सारा वातावरण प्रदूषण-मुक्त हो जाता है ‌। ऑक्सीजन बनती है जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं है।
गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है ‌। गाय के घी में वैक्सीनेशन न्यूट्रिक एसिड ,बीटा कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्रियंस मौजूद होते हैं जिनके सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है । गाय के घी से उत्पन्न शरीर में माइक्रो न्यूट्रियंस से कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। गाय के शरीर से उत्पन्न होता है सोना. वैज्ञानिक शोधों से ज्ञात हुआ है  कि गाय ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो ऑक्सीजन ग्रहण करती है और ऑक्सीजन ही छोड़ती है । इसलिए यह पर्यावरण को जरा भी हानि नहीं पहुंचाती ‌। गाय के आसपास होने पर आपको सर्दी , खांसी , संक्रमण  रोग नहीं होते हैं । गाय की पीठ पर रीड की हड्डी में स्थित सूर्यकेतु नाडी़ हानिकारक विकरणों को वातावरण से दूर करती हैं । इससे वातावरण शुद्ध होता है यह बात वैज्ञानिक भी सिद्ध कर चुके हैं कि सूर्यकेतु नाड़ी सूर्य की किरणों के संपर्क में आने पर स्वर्ण का उत्पादन करती है । गाय के शरीर में उत्पन्न यह सोना उसके दूध , घी ,मूत्र और गोबर में सूक्ष्म मात्रा में पाया जाता है । यही कारण है कि गाय का दूध थोड़ा सा पीला होता है। यह रसायन होता है और रस-रक्त आदि की वृद्धि करके शरीर का पोषण करता है । इसके मूत्र और गोबर में अनेक प्रकार के रोगों को दूर करने की क्षमता होती है। गाय का पंचगव्य अर्थात् दूध दही, घी, मूत्र और गोबर इसके उपयोग से रोगों के निवारण की विधि तो आयुर्वेद में सदियों से लिखी हुई है । पंचगव्य से कैंसर जैसे जानलेवा रोगों तक का इलाज किया जा रहा है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार अनिंद्रा का रोगी शाम को दोनो नथुनों में गाय के घी की दो दो बुंद डाले और रात को नाभि व पैरो के तलवों मे गौधर  लगाकर लेट जाए तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आयेगी ।
1/गाय का भी नाक में डालने से पागलपन दूर हो जाता है
2/गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
3/गाय का घी नाक में डालने से खर्राटे नहीं आते
4/गाय का घी 20 से 25 ग्राम घी में मिश्री खिलाने से शराब भांग में गांजे का नशा कम हो जाता हैगाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग ठीक हो जाता है
5/हिचकी के नए रोकने पर खाली गाय का घी आधा चम्मच घी खाए हिचकी स्वम रुक जाएगी
6/गाय का घी नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है
गाय के घी को ठंडे जल में फिर ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग 100 बार करें और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला ले इस विधि द्वारा प्राप्त की एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा संबंधी हो चर्म रोग में चमत्कारिक मरहम की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं यह है सोरायसिस के लिए भी कारगर है।