MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पाण्डेय) अडानी पावर लिमिटेड की सहायक कंपनी मीरजापुर थर्मल एनर्जी (यूपी) प्राइवेट लिमिटेड, जनपद के ग्राम ददरी खुर्द, मड़िहान वन रेंज में 2×800 मेगावाट कोयला आधारित अल्ट्रासुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) विद्युत उत्पादन के लिए प्रस्तावित है, 1600 मेगावाट क्षमता के प्रस्तावित विद्युत स्टेशन के लिए लगभग 365.19 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। जिसमें से 364.57 हेक्टेयर गैर वन भूमि है और 0.62 हेक्टेयर संयंत्र सीमा के अंदर वन भूमि है। निर्माण के बाद जब यह पावरप्लांट चालू होगा तब यहां बिजली बनाने के लिए संयंत्र को 36 एमसीएम मिलियन क्यूबिक मीटर (Million Cubic Meters) पानी यानि कि 360 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इस पानी की आपूर्ति गंगा नदी से की जाएगी। यहाँ से पानी निकाल कर अपर खजुरी जलाशय में ले जाया जाएगा इसके बाद अपर खजुरी जलाशय से पानी निकाल कर ददरी स्थित पावर प्लांट पर ले जाकर विद्युत उत्पादन के उपयोग में लिया जाएगा। आने वाले समय में पानी की कमी की वजह से आने वाली दिक्कतों को देखते हुए किसान संगठन अपर खजुरी जलाशय से अडानी ग्रुप के पानी लेने का विरोध जता रहे हैं। इस विरोध का कारण समझने से पहले इस पूरे इकोलॉजिकल सिस्टम को समझते हैं। विधन जलप्रपात खजूरी नदी पर स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक जलप्रपात है। यहां वन विभाग का प्राकृतिक पार्क भी है। अपर और लोवर खजूरी जलाशय के बीच नदी की लंबाई लगभग 10 किमी है। लोवर खजूरी जलाशय का पानी बीएचयू दक्षिण परिसर के लिए पेयजल का स्रोत है। ऊपर खजूरी नदी के जल से ही विन्धम फॉल और खड़ंजा फॉल और लोअर खजूरी जलाशय का अस्तित्व है। दोनों ही सिंचाई परियोजनाएँ हैं। इन दोनों बांधो के पानी से होने वाली खेती से 1 लाख से अधिक लोगों की जीविका चलती है।







