Home उत्तर प्रदेश गरीबों के मसीहा के हस्तक्षेप के बाद चार साल बाद टूटा अन्याय...

गरीबों के मसीहा के हस्तक्षेप के बाद चार साल बाद टूटा अन्याय का ताला, कनीक लिपिक को मिला इंसाफ, बहाल हुई वेतनवृद्धि

MIRZAPUR NEWS: (सुनील कुमार गुप्ता)  न्याय के मसीहा कहे जाने वाले राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री सोहन लाल श्रीमाली के हस्तक्षेप से मिर्जापुर सीएमओ कार्यालय में तैनात कनीक लिपिक राजीव कुमार गुप्ता को लगभग चार साल बाद न्याय मिला है। आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि राजीव कुमार गुप्ता के साथ अन्याय और मानसिक उत्पीड़न हुआ। प्रकरण में शिकायतकर्ता का आरोप था कि उनके पति राजीव कुमार गुप्ता को बिना किसी ठोस साक्ष्य के अनाधिकृत धनार्जन और भ्रष्टाचार में लिप्त बताकर स्थानांतरित कर दिया गया। जबकि श्री गुप्ता विंध्याचल मंडल, मीरजापुर में 26 वर्षों से सेवा दे रहे थे। मंडलायुक्त के पत्र के आधार पर 29 जून 2021 को उनका स्थानांतरण महोबा कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने विभाग से भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया। मंडलायुक्त के प्रतिनिधि भी सुनवाई में आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। विभागीय प्रतिनिधि ने मौखिक रूप से स्वीकार किया कि  गुप्ता के साथ अन्याय हुआ है। आयोग के समक्ष यह भी तथ्य सामने आया कि लगाए गए आरोपों के कारण गुप्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और उन्हें सहकर्मियों के बीच लज्जा व हीन भावना का सामना करना पड़ा। महोबा में तैनाती के दौरान उनके पत्रों को रिसीव न करना, अपीलीय पत्र अग्रसारित न किया जाना उनके मानसिक उत्पीड़न का कारण बना।
विशेष सचिव चिकित्सा अनुभाग-4 के निर्देश पर निदेशक (प्रशासन) द्वारा 7 अप्रैल 2025 को जारी आदेश में पूर्व में लगाए गए “अनाधिकृत धनार्जन एवं भ्रष्टाचार” संबंधी आरोपों को विभागीय अभिलेखों से हटा दिया गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि श्री गुप्ता पर लगाए गए आरोप निराधार और मिथ्या थे। आयोग ने इसे पिछड़ा वर्ग के उत्पीड़न की श्रेणी में माना। आयोग ने अपने निर्णय में निर्देश दिया है कि श्री राजीव कुमार गुप्ता की रोकी गई एक वेतनवृद्धि बहाल की जाए तथा अब तक का समस्त बकाया वेतन भुगतान किया जाए। साथ ही एक माह के भीतर की गई कार्रवाई की सूचना आयोग को दी जाए। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली द्वारा की गई इस कार्रवाई से पीड़ित कर्मचारी को न्याय मिला है और सत्य की जीत हुई है।