आलू 90 से 100 दिनो में तैयार होगा:ओम प्रकाश गुप्ता
KUSHINAGAR NEWS: हाटा विकास ग्राम रामपुर पोटवा पंचायत भवन में शरदकालीन गन्ना विकास गोष्ठी का आयोजन किया गया। पूर्व सहायक निदेशक, गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि शरदकालीन गन्ने के साथ आलू की सहफसली खेती से मात्र 90 से 100 दिनो में एक एकड़ में 80 से 90 कुन्तल आलू होगा। आलू बोने से गन्ने की 40 से 50 कुन्तल औसत उपज बढ़ जायेगी। दस रुपया किलो आलू बेचने पर 80 से 90 हजार का होगा। जिससे किसानो की आय बढ़ेगी। गन्ने की उत्पादन लागत घटेगी। अवध चीनी मिल के गेट परिक्षेत्र में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाने तथा शरदकालीन गन्ने को आधुनिक शोध तकनीक का बेहतर ढंग से उपयोग कर गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी परता में वृद्धि करने एवं गन्ने के साथ सहफसली खेती करके किसान की आय बढाने के लिए अधिशासी अध्यक्ष आर. के. गुप्ता के मार्गदर्शन में गांव-गांव में विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। गन्ना विशेषज्ञ श्री गुप्ता ने किसानो को गन्ने के साथ आलू का फोटोग्राफ दिखाते हुए बताया कि गन्ने की अधिक उपज देने वाली प्रमुख प्रजातियां को.0118, को.शा.13235, को. 15023, को. लख.14201 हैं।जिन खेतों में पानी लगता है उसमें को. पंत 9301 की बुवाई करें। शरदकालीन गन्ने की दो पंक्तियों के बीच 4 फुट की दूरी रखें, उस चार फुट में आलू की दो पंक्तियां बोएं। आलू की अधिक उपज देने वाली प्रमुख प्रजातियां कुफरी बादशाह, कुफरी शक्तिमान, कुफरी लालिमा आदि की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में करें। एक एकड़ खेत की बुवाई में 8 से 9 कुंतल आलू लगेगा।आलू के लिए अलग से उर्वरक का प्रयोग करें। बुवाई के समय गन्ने की दो पंक्तियों के बीच में प्रति एकड़ 75 किलोग्राम डीएपी, 50 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश या तीन बोरा जैविक पोटाश (चीनी मिल का) अच्छी तरह गुड़ाई कर मिट्टी में मिला दें। अधिक उपज लेने के लिए एक एकड़ खेत में अंतिम जुताई के समय तीन या चार ट्रॉली गोबर की सड़ी खाद अवश्य प्रयोग करें। आलू बोने के 30 से 35 दिनों पर मिट्टी चढ़ाए व 35 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ प्रयोग करें। विशेष जानकारी के लिए चीनी मिल द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें। वैज्ञानिक ढंग से खेती करने पर आलू की उपज 80 से 90 कुंतल प्रति एकड़ होगी। गन्ने की उपज 300 से 400 कुंतल प्रति एकड़ होगी। अधिशासी अध्यक्ष आर.के. गुप्ता ने बताया कि चीनी मिल गेट परिक्षेत्र के प्रत्येक गांव में सहफसली खेती का प्रदर्शन चीनी मिल करायेगी। सहफसल का चुनाव किसान अपनी सुविधा अनुसार, अपने खेत के अनुसार स्वयं करेंगे। शरदकालीन गन्ने के साथ तोरिया, गेहूं, आलू, लहसुन, धनिया, गोभी, टमाटर, मटर, मसूर आदि की बुवाई की जा सकती है। गन्ना प्रबंधक संजय सिंह ने बताया की तोरिया का बीज, पोटाश, ट्राइकोडर्मा, बीज गन्ना इस समय दिया जा रहा है। इस गांव में 45 एकड़ गन्ना बोने का लक्ष्य है।







