वन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं सवाल
PRATAPGARH NEWS: जनपद के मांधाता कोतवाली क्षेत्र में वन संरक्षण कानून की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में हरे-भरे, फलदार वृक्षों पर बेरहमी से आरा चलाया जा रहा है, और प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ों की अवैध कटाई में कुछ ठेकेदारों की मिलीभगत है, जो बिना किसी वैध अनुमति के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग द्वारा वाकई में इन पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है? अगर नहीं, तो फिर इतने घनी आबादी वाले क्षेत्र में खुलेआम आरा मशीनों का संचालन कैसे संभव हो रहा है? वन विभाग और स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत या लापरवाही का आरोप लगना स्वाभाविक है। इतनी नजदीकी पर अवैध गतिविधियाँ अगर किसी की नजर में नहीं आतीं, तो यह सवाल खड़े करता है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? फलदार वृक्ष, जो न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए भी आवश्यक हैं, इस तरह से काटे जा रहे हैं जैसे उनका कोई मूल्य ही न हो। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए भी एक खतरा है। जनता अब इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। यदि वन विभाग और पुलिस समय रहते जागरूक नहीं हुई, तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।







