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कुरैश नगर में पूरे अदब व एहतराम के साथ मनाई गई इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की यौमे-ए-विलादत

MIRZAPUR NEWS:  (शाहिद वारसी)  शुक्रवार को इस्लामी तारीख़ 3 शाबान 1447 हिजरी के अवसर पर नवासे-ए-रसूल, गौस-ए-बतूल, सरदार-ए-जन्नत, इस्लाम के अज़ीम रहनुमा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की यौमे-ए-विलादत कुरैश नगर में पूरे अदब, अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर मगरीब की नमाज़ के बाद नज़र-ओ-नियाज़ का एहतमाम किया गया, जिसमें बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। इस नूरानी महफ़िल में मासूम बच्चों से लेकर नौजवानों और बुज़ुर्गों तक शामिल रहे । मुफ्ती-ए-शहर मीरजापुर मौलाना अब्दुल खालिक साहब की सरपरस्ती में हाफ़िज़ शाहनवाज़ वारसी और हाफ़िज़ अकरम ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत से कार्यक्रम का आग़ाज़ किया। इसके बाद मौलाना अब्दुल खालिक साहब ने नज़र को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बारगाह-ए-अक़दस में पेश किया। इसके बाद अल्लाह तआला के बारगाह में हाथ उठाकर दुआ की गई, जिसमें शहर में शांति मुल्क में भाईचारा, रोज़ी में बरकत और बीमारों की सेहतयाबी के लिए ख़ुसूसी दुआएँ मांगी गईं। इस अवसर पर डॉक्टर सद्दाम वारसी ने बताया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम सैय्यदा फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के फरज़ंद और मौला अली अलैहिस्सलाम के छोटे शहज़ादे थे। उनकी परवरिश नबी-ए-करीम सल्ललाहों अलैहि वसल्लम की गोद में हुई। ऐसा पाकीज़ा घराना और मुक़द्दस तरबियत का माहौल था, जिसकी मिसाल तारीख़-ए-इस्लाम में नहीं मिलती। पैगंबर मोहम्मद सल्ललाहों अलैहि वसल्लम को अपने नवासे से बेपनाह मोहब्बत थी। हदीस-ए-पाक में रसूलुल्लाह ने फरमाया है कि “हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से हूँ। अल्लाह तआला उस शख़्स से मोहब्बत फ़रमाता है जो हुसैन से मोहब्बत करता है। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का मरतबा इतना बुलंद था कि नबी-ए-करीम सल्ललाहों अलैहि वसल्लम ने उनकी वजह से अपने सज्दों को तवील फ़रमा दिया करते थे, ताकि उनके नवासे को किसी क़िस्म की तकलीफ़ न पहुँचे। इस रूहानी महफ़िल में दानिश वारसी, सद्दाम वारसी, चौधरी वारिस अली, रहमत अली, हैदर अली, फरदीन, सद्दाम, सुहैल, शहज़ादे, फिरोज़, हुसैन वारसी, मोनू, आमिर कुरैशी, तबरेज़ वारसी समेत मोहल्ले के बड़ी तादाद में लोग मौजूद रहे।