PRATAPGARH NEWS: अमृता देवी स्मृति प्रकृति पूजन कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण गतिविधि प्रतापगढ़ नगर, दिव्या प्रेम सेवा मिशन, एवं पतंजलि संस्थान के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में सई नदी के तट पर स्थित डीह बाबा के स्थान पर विभाग पर्यावरण संयोजक अनिल मिश्रा, नगर पर्यावरण संयोजक रोहित कुमार, विभाग प्रचारक ओमप्रकाश, जिला कार्यवाह हेमंत, कुंडा के जिला कार्यवाह अजय, नगर कार्यवाह अंकित, डॉ आर.के सिंह सहित अनेक नारी शक्तियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। प्रकृति वंदन का उद्देश्य और पर्यावरण बलिदानी अमृता देवी का बलिदान लोगों के सामने रखते हुए कृष्णमोहन ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण जिसके अंतर्गत मिट्टी, पानी, हवा, ध्वनि प्रदूषण आता है आज चारों अत्यधिक प्रदूषित हो चुके हैं कहीं की मिट्टी को खोदिए शुद्ध मिट्टी नहीं मिलेगी कहीं का जल लीजिए शुद्ध नहीं मिलेगा, हवा कहीं शुद्ध नहीं मिलेगा और कहीं शांति नहीं मिलेगी अर्थात शोर-शराबा का माहौल है ।। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी आग का गोला बनता जा रहा है, पानी जहरीला होता जा रहा है। हवा में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा अत्यधिक है ऐसी स्थिति में संपूर्ण मानव जाति को ग्लोबल वार्मिंग की मार झेलनी पड़ रही है दूषित जल प्रयोग सब की मजबूरी है मिट्टी जहरीली होने के कारण कोई भी खाद्य पदार्थ शुद्ध नहीं रह गए हैं। ध्वनि प्रदूषण के कारण कहीं भी शांति और सुकून का वातावरण नहीं है ऐसी स्थिति में अमृता देवी का स्मरण और उनके कार्यों का अनुसरण हम सबको इस विश्वव्यापी जटिल समस्या से मुक्ति दिलाएगा अमृता देवी ने जिनकी आयु मात्र 42 वर्ष थी 1730 में हरे पेड़ों को बचाने के लिए अपने सहित अपने तीन पुत्रियों जिनकी आयु 8 ,10 और 12 वर्ष की अपने सिर को कटवा दिया था और उनका अनुसरण करते हुए 363 लोग बलिदान हुए थे हरे पेड़ों को बचाने के लिए जिसमें 71 नारी शक्तियां थी विश्व पर्यावरण के इतिहास में इतना बड़ा बलिदान आज तक नहीं हुआ है यह संपूर्ण नारी जगत ही नहीं तो मानव जाति के लिए गौरव की बात है कि हमारे पूर्वजों ने हमारे भलाई के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। क्रोना के दूसरे लहर में सबसे अधिक ऑक्सीजन के लिए ही हाहाकार मचा हुआ था ऑक्सीजन हमें पेड़ों से ही मिलते हैं जो पृथ्वी पर न्यूनतम से भी न्यूनतम स्थिति में है पर्यावरण प्रदूषण रूपी विश्वव्यापी जटिल समस्या से मुक्ति प्रकृति के प्रति आदर का भाव रखते हुए पृथ्वी पर हरियाली बढ़ाने से ही मिलेगी। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने वैदिक मित्रों के साथ पीपल वृक्ष का पूजन किया और पर्यावरण मुखी जीवन शैली जीने का संकल्प लिया।







