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कजरी विधा है जो संबंधों को जीवंत करती एवं प्रेम राग की संवेदना को उभारती है:  रजनीकांत मणि त्रिपाठी

KUSHINAGAR NEWS: उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्थान, लखनऊ संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित  कुशीनगर में सात दिवसीय होने वाले कजरी  लोक गायन कार्यशाला का शुभारंभ पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण कर किया lबच्चों को सम्बोधित करते हुए श्री मणि ने कहा कि कजरी विधा है जिसमें घर परिवार के आपसी सम्बन्धों को जीवंत करती है तथा प्रेम राग की संवेदना को उभारती है उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से निकली कजरी एक विधा बन गई कजरी गायन में प्रेम विरह भक्ति और राष्ट्र भक्ति सभी कुछ सम्मिलित हैं कजरी एक तरफ गांव  के मजदूर किसान साधारण महिला को जोड़ता है तो दूसरी तरफ संगीत और गीत के बड़े  आयोजनों से कहीं कहीं कजरी की स्वाधीनता अवलोकन से जुडी बड़ी घटनाएं भी है lप्रशिक्षक के रूप में लोक गायक धीरज राव ने बच्चों को कजरी बिधा के रूप में एक से बढ़कर एक गीत को पढ़ाया और गंवाया बच्चों को कजरी के विषय पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी l कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक मनीष कुमार करते हुए कहा कि हमारे विद्यालय का सौभाग्य है कि ऐसे कार्यक्रम उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित किया गया है जिससे हमारे विधालय के बच्चों को शिक्षण के साथ संगीत सिखने का मौका मिला है इस अवसर पर  कुंवर मद्धेशिया, राजन गुप्ता ,सतीश कुशवाहा ,अजित श्रीवास्तव, स्नेहा राव ,आरती प्रजापति ,बबिता पासवान, नरगिस सिद्दिकी, मृदुला तिवारी, दिलिप यादव, प्रमोद राव अनिल यादव आदि मौजूद रहे।